महाराष्ट्र में दिवाली से पहले 'आनंद का शिधा' न मिलने के कारण मायूस बैठे जरूरतमंद ग्रामीण।   

महाराष्ट्र के त-हाडी में दिवाली से पहले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। त्योहार के दौरान राशन दुकानों से मिलने वाला ‘आनंद का शिधा’ उपलब्ध नहीं होने के कारण जरूरतमंद परिवारों में नाराजगी है। ‘आनंद का शिधा’ योजना बंद होने की पृष्ठभूमि में सूखे की मार झेल रहे गरीब परिवारों को सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता से भी वंचित रहना पड़ रहा है। दिवाली पर घरों में मिठाइयां बनाने और त्योहार मनाने की उम्मीद लगाए बैठे लाभार्थियों को निराशा हाथ लगी है।

महंगाई, सूखे और त्योहार के अतिरिक्त खर्च ने गरीब परिवारों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले से ही जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और रोजाना की अनिश्चित कमाई के बीच घर का खर्च चलाना चुनौती बना हुआ है। वहीं, सूखे की स्थिति के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों, खेत मजदूरों और दिहाड़ी पर काम करने वाले परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे हालात में गरीब परिवारों को उम्मीद थी कि दिवाली के अवसर पर सरकार की ओर से मिलने वाला ‘आनंद का शिधा’ उन्हें कुछ राहत देगा। लेकिन राशन दुकानों पर यह सामग्री उपलब्ध नहीं होने से लाभार्थियों में निराशा है।

दरअसल, दिवाली पर हर परिवार की इच्छा होती है कि घर में मिठाइयां बनें, बच्चों को खुशी मिले और पूरा परिवार मिलकर त्योहार मनाए। हालांकि, रोजाना की कमाई पर निर्भर परिवारों के लिए त्योहार का अतिरिक्त खर्च उठाना भी बड़ी चुनौती है। सरकारी सहायता मिलने से त्योहार का आर्थिक बोझ कुछ कम होने की उम्मीद थी, लेकिन ‘आनंद का शिधा’ नहीं मिलने से गरीब परिवारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

एक ओर सूखे के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर त्योहार के दौरान मिलने वाली सरकारी सहायता को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में जरूरतमंद परिवारों को दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार पर राहत देने वाली योजनाओं का लाभ समय पर मिलना जरूरी है।

स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि यदि ‘आनंद का शिधा’ योजना बंद कर दी गई है, तो सरकार इसके पीछे के कारण स्पष्ट करे और लाभार्थियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी दे। प्रशासन को भी योजना की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है, ताकि सहायता की प्रतीक्षा कर रहे गरीब परिवारों को केवल आश्वासनों के भरोसे न रहना पड़े।

दिवाली के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत देने के लिए सरकार और प्रशासन से तत्काल ध्यान देने की अपेक्षा की जा रही है। सूखे के कारण आमदनी घटने, महंगाई से घरेलू खर्च बढ़ने और ‘आनंद का शिधा’ उपलब्ध नहीं होने के बीच गरीब परिवारों के सामने त्योहार मनाने का सवाल खड़ा हो गया है। नागरिकों का सवाल है कि जब आर्थिक संकट के बीच सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता भी नहीं मिल रही, तो गरीब परिवार दिवाली कैसे मनाएं? ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि सरकार जरूरतमंद परिवारों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ठोस कदम उठाए, ताकि दिवाली का त्योहार उनके घरों में भी खुशियों के साथ मनाया जा सके।

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