डीग में नरसी जी के जीवन और नानी बाई के मायरे की लीला का हुआ मंचन, मोहरों की वर्षा ने मोहा मन
डीग के श्री बृज लठावन धाम में श्री कृष्ण लीला एवं भक्त चरित्रामृत महोत्सव के दौरान नरसी जी के जीवन और नानी बाई के मायरे का मंचन हुआ। ढाई घड़ी तक मोहरों की वर्षा के प्रसंग ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया।
तस्वीर में डीग के बृज लठावन धाम में आयोजित रामलीला महोत्सव के दौरान श्री कृष्ण लीला का मंचन करते कलाकार और मौजूद लोग दिख रहे हैं।
डीग। श्री बृज लठावन धाम में स्थानीय रामलीला महोत्सव समिति डीग के तत्वावधान में आयोजित श्री कृष्ण लीला एवं भक्त चरित्रामृत लीला महोत्सव के अंतर्गत भक्त नरसी जी के चरित्र और नानी बाई के मायरे की लीला का मंचन किया गया। लीला में भगवान श्रीकृष्ण की भक्त नरसी जी के प्रति कृपा और नानी बाई के मायरे में प्रभु द्वारा उनकी लाज रखने के प्रसंगों को प्रस्तुत किया गया।
मंचन के दौरान दर्शाया गया कि नरसी जी बचपन से ही भगवान के परम भक्त थे। वे संतों के साथ सत्संग करते और भगवान की भक्ति में लीन रहते थे। अपनी भाभी के उलाहने से आहत होकर नरसी जी ने गृह त्याग दिया और वृंदावन पहुंच गए। वहां उन्होंने ठाकुर जी की दिव्य लीलाओं के दर्शन किए। भगवान की कृपा से उन्हें दिव्य अनुभूति प्राप्त हुई। इस दौरान प्रभु ने उन्हें वचन दिया कि जब-जब वे सच्चे मन से उन्हें पुकारेंगे, भगवान उनकी सहायता के लिए अवश्य आएंगे।
इसके बाद लीला में नरसी जी की हुंडी और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। वहीं, नानी बाई के मायरे की लीला में दिखाया गया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने नरसी जी की लाज रखते हुए नानी बाई का भात भरा। इस प्रसंग के दौरान ढाई घड़ी तक मोहरों की वर्षा का मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
इस अवसर पर समिति के संरक्षक एवं लक्ष्मण मंदिर के महंत पंडित मुरारी लाल पाराशर, गौरी शंकर पाराशर, प्रकाश पाराशर, भाजपा शहर मंडल अध्यक्ष ललित तिवारी, सभासद हरेन्द्र सिंह खग्गू, पूर्व भाजपा शहर मंडल अध्यक्ष राजेंद्र खण्डेलवाल, पवन खण्डेलवाल, लोक अभियोजक राकेश खण्डेलवाल, एडवोकेट रमाकांत शर्मा, एडवोकेट पंकज भूषण गोयल, हरिओम पाराशर, मुकेश भारद्वाज, हरपाल सोलंकी, राजू गोयल, चन्दन बंसल, राजू शर्मा, जय प्रकाश सोनी, राजेश चन्सोरिया, छत्रपाल सिंह गुर्जर, बाबू लाल गोयल, चन्द्र प्रकाश शर्मा और डॉ. राकेश सोनी (सोनी हास्पीटल, भिवाडी) मौजूद थे।