विश्व शांति के लिए योग सबसे प्रभावी मार्ग: चित्तौड़गढ़ सेमिनार में स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज का संदेश
चित्तौड़गढ़ स्थित श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज ने वैश्विक युद्ध, मानसिक तनाव और विश्व शांति के बीच योग की प्रासंगिकता पर महत्वपूर्ण विचार रखे। कार्यक्रम में देशभर के विद्वानों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने भी अपने विचार साझा किए।
तस्वीर में श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के बाहर सड़क पर एकत्रित भीड़ और वाहन दिखाई दे रहे हैं।
चित्तौड़गढ़। श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय, जावदा, निम्बाहेड़ा (राजस्थान) एवं भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के योग विभाग द्वारा शुक्रवार को "वर्तमान वैश्विक युद्ध परिस्थितियों में योग की प्रासंगिकता: दार्शनिक विमर्श, मानसिक स्वास्थ्य एवं वैश्विक शांति की संभावना" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन विश्वविद्यालय सभागार में किया गया। देशभर के विद्वानों, शोधार्थियों एवं शिक्षाविदों की सहभागिता से आयोजित इस सेमिनार में योग, भारतीय दर्शन और विश्व शांति जैसे समसामयिक विषयों पर गंभीर एवं सार्थक चिंतन हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज रहे, जबकि इसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन कैलाशचंद्र मून्दड़ा ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री कल्लाजी महाराज एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। प्रारंभ में विश्वविद्यालय की संकायाध्यक्ष डॉ. स्मिता शर्मा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया।
सेमिनार के संयोजक डॉ. सौरभ जोशी ने विषय प्रवर्तन करते हुए वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में योग की उपयोगिता तथा भारतीय दर्शन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय की छात्रा लक्ष्मी एवं सरला ने मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम के वातावरण को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा से ओतप्रोत कर दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन कैलाशचंद्र मून्दड़ा ने मुख्य अतिथि स्वामी सुदर्शनाचार्यजी महाराज का भगवान श्रीराम की दिव्य प्रतिमा एवं 'चित्तौड़ फाइल्स' पुस्तक भेंट कर सम्मान किया।
विश्वविद्यालय के पीएच.डी. शोधार्थी मंगलाराम ने अपने शोधपत्र का प्रभावशाली वाचन किया। वहीं सारस्वत वक्ता के रूप में प्रो. ओमनारायण तिवारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि भारतीय दर्शन और योग केवल आध्यात्मिक साधना के विषय नहीं हैं, बल्कि वर्तमान विश्व की जटिल समस्याओं के समाधान का प्रभावी आधार भी हैं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समरसता एवं वैश्विक शांति की स्थापना में योग की निर्णायक भूमिका पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में स्वामी सुदर्शनाचार्यजी महाराज ने कहा कि आज जब सम्पूर्ण विश्व हिंसा, तनाव, युद्ध और मानसिक असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, तब भारतीय योग दर्शन सम्पूर्ण मानवता के लिए आशा का प्रकाश बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की पद्धति नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वय का दिव्य विज्ञान है, जो विश्व में शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना का मार्ग प्रशस्त करता है।
स्वामी सुदर्शनाचार्यजी महाराज ने विशेष रूप से श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय द्वारा वैदिक शिक्षा, भारतीय संस्कृति एवं सनातन ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की। इस अवसर पर सहायक आचार्य डॉ. सुनील कुमार शर्मा, डॉ. राहुल प्रसाद सती, डॉ. रचना शर्मा, डॉ. अभिषेक भण्डारी, डॉ. नटवर भाम्बी, आकाश टांक, मेघा मंत्री, कुसुम गुर्जर, नितिन गिल, हेमंत मेघवाल, देवेन्द्र जैन, अर्पित चौधरी सहित विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। सेमिनार में योग, भारतीय दर्शन, मानसिक स्वास्थ्य और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर हुए विचार-विमर्श ने कार्यक्रम को महत्वपूर्ण आयाम प्रदान किया।