संत दिग्विजयराम बोले: सत्संग नहीं कर सकते तो कुसंग भी न करें, शिव पुराण कथा में बताए जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र
बड़ी सादड़ी के रामद्धारा में शिव पुराण कथा के दौरान संत दिग्विजयराम महाराज ने सत्संग, कुसंग, भक्ति और भोजन संबंधी आचरण पर महत्वपूर्ण संदेश दिए।
तस्वीर में मंच पर व्यासपीठ से शिव पुराण कथा का वाचन करते संत दिग्विजयराम महाराज दिखाई दे रहे हैं।
बड़ी सादड़ी, चित्तौड़गढ़ में रामद्धारा में चातुर्मास के तहत आयोजित शिव पुराण कथा के दौरान संत दिग्विजयराम महाराज ने कहा कि यदि जीवन में सत्संग नहीं कर सकते हैं तो कुसंग भी नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्संग से भवसागर पार हो जाता है, जबकि कुसंग व्यक्ति के जीवन को बर्बाद कर देता है।
कथा वाचन के दौरान संत दिग्विजयराम महाराज ने कहा कि जिस प्रकार सोना तांबे की संगत करने पर अपना मूल्य खो देता है, उसी प्रकार कुसंग व्यक्ति के जीवन को नष्ट कर देती है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का चरित्र जानना हो तो उसकी संगत की जानकारी ही उसके व्यक्तित्व का परिचय दे देती है।
उन्होंने कहा कि यदि भक्ति और भाव सच्चे हों तो भगवान भी प्रसाद ग्रहण करने के लिए आतुर रहते हैं। उन्होंने शबरी के बेर, सुदामा के चावल, करमा बाई का खीचड़ा, विदुर के घर साग ग्रहण करने तथा दुर्योधन के मेवे त्यागने का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके प्रमाण ग्रंथों में मिलते हैं। संत ने यह भी कहा कि पंडरपुर में नामदेव की भक्ति से प्रसन्न होकर पत्थर की मूर्ति ने भी दूध पिया था। उन्होंने कहा कि पूरा खेल भाव और भक्ति का है। संसार का सूत्र है कि पहले देखो, फिर विश्वास करो, जबकि भक्ति का संदेश है कि पहले विश्वास करो।
संत दिग्विजयराम महाराज ने भोजन से जुड़े आचरण पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जिस थाली को कोई लांघकर चला जाए, जिस थाली को ठोकर लग जाए अथवा जिस थाली में परोसे गए भोजन में बाल निकल आए, उस थाली में भोजन नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी को एक ही थाली में भोजन नहीं करना चाहिए। वहीं, यदि भाई-भाई एक साथ भोजन करते हैं तो समृद्धि आती है। उन्होंने कहा कि यदि पिता और अविवाहित पुत्री एक ही थाली में भोजन करें तो पिता की अकाल मृत्यु नहीं होती।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इन बातों का मूल भाव अशुद्ध भोजन का त्याग करना है। संत ने कहा कि पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से आयु में वृद्धि होती है, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से कीर्ति बढ़ती है, पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से धन-समृद्धि प्राप्त होती है तथा उत्तर दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से सत्य और ज्ञान की प्राप्ति होती है। चातुर्मास के तहत आयोजित शिव पुराण कथा में संत दिग्विजयराम महाराज ने सत्संग, भक्ति, संगत और जीवन आचरण से जुड़े इन संदेशों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन के महत्व से अवगत कराया।