चित्तौड़गढ़ में बोले संत दिग्विजयराम- विधि के विधान और कर्मफल से भगवान भी नहीं बचे
चित्तौड़गढ़ के रामद्वारा में आयोजित महाशिव पुराण कथा के दौरान संत दिग्विजयराम ने कहा कि जीवन में सुख-दुख और यश-अपयश सब विधि के हाथ में है।
तस्वीर में व्यासपीठ पर बैठकर संत दिग्विजयराम महाराज माइक के सामने कथा वाचन करते हुए।
चित्तौड़गढ़ के रामद्वारा में चातुर्मासिक सत्संग के तहत आयोजित महाशिव पुराण कथा में पार्वती खंड प्रसंग का वाचन करते हुए संत दिग्विजयराम महाराज ने कहा कि विधाता की कलम से खुद भगवान भी नहीं बच पाए। विधि में लिखे लेख के कारण ही प्रभु श्रीराम को भी चौदह वर्ष का वनवास भोगना पड़ा। उन्होंने कहा कि कर्म ही जीवन की धुरी है।
संत दिग्विजयराम महाराज ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार जीव को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है। भगवत नाम का आश्रय नहीं लेने वाले को कोटि जन्म में भी कर्मों का फल भोगना पड़ता है। वनवास के दौरान निषादराज लक्ष्मण से कहते हैं कि माता कैकयी ने वरदान नहीं मांगा होता तो प्रभु श्रीराम को वनवास नहीं भोगना पड़ता, लेकिन लक्ष्मण उन्हें रोकते हैं।
लक्ष्मण कहते हैं कि कोई किसी को दुख और सुख नहीं दे सकता। यह सब विधि के हाथ में है। नाम के आश्रय से असत कर्मों को भी समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान के नाम की महिमा चित्तपूर्वक सुननी चाहिए। जीव मति भ्रम के कारण निर्णय कर लेते हैं, लेकिन निर्णय विवेक से होना चाहिए।
संत दिग्विजयराम महाराज ने कहा कि सब कुछ हमारे अनुकूल हो जाए तो हम उसे सुख मान लेते हैं और मन के अनुकूल नहीं हो तो उसे दुख मान लेते हैं। राजा बलि का छुपकर वध किया था, लेकिन कर्मों के कारण भगवान को भी उसका फल भोगना पड़ा। भगवान भी विधाता की कलम से नहीं बच पाए। हानि-लाभ, जीवन-मरण और यश-अपयश, यह सब विधि के हाथ में होता है।
उन्होंने सिकंदर का उदाहरण देते हुए कहा कि जब सिकंदर दुनिया से गया तो उसके दोनों हाथ खाली थे। उसकी राह में धन-दौलत बिछा दी गई, लेकिन साथ कुछ भी नहीं गया। धन से सांसें नहीं खरीदी जा सकतीं।
महाशिव पुराण के प्रसंग में संत दिग्विजयराम महाराज ने कहा कि भगवान महादेव के तीसरा नेत्र खोलने से कामदेव भस्म हो गए। इसके बाद उनकी पत्नी रति महादेव के पास गई और विलाप करने लगी। तब महादेव ने वरदान दिया कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के यहां कामदेव उनके पुत्र के रूप में जन्म लेंगे, जिनका नाम प्रद्युम्न होगा।