ड्रॉपआउट बच्चों को फिर शिक्षा से जोड़ने पर जोर, बेगूं में प्रधानाध्यापकों को किया जागरूक
बेगूं में विधिक साक्षरता शिविर के दौरान ड्रॉपआउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, नालसा शिक्षा योजना 2026, बाल अधिकार, साइबर अपराध और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर प्रधानाध्यापकों व विद्यार्थियों को जागरूक किया गया।
तस्वीर में बेगूं के एक विद्यालय परिसर में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर के दौरान बैठे हुए छात्र और मौजूद अधिकारी व शिक्षक नजर आ रहे हैं।
बेगूं। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार शनिवार को तालुका विधिक सेवा समिति बेगूं के तत्वावधान में दो विद्यालयों तथा ब्लॉक स्तरीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक प्रधानाध्यापक वाकपीठ में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विद्यालय से ड्रॉपआउट हो चुके बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के साथ बाल अधिकार, साइबर अपराध, मानसिक स्वास्थ्य और अन्य कानूनी एवं सामाजिक विषयों पर प्रधानाध्यापकों तथा विद्यार्थियों को जागरूक किया गया।
शिवाजी माध्यमिक विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में तालुका विधिक सेवा समिति की सचिव लक्षिता पालीवाल ने विद्यार्थियों को अजनबियों से सावधान रहने के उपाय बताए। उन्होंने अपहरण एवं व्यपहरण से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि 16 वर्ष से कम आयु के बच्चे को माता-पिता या वैध अभिभावक की अनुमति के बिना ले जाना अपहरण की श्रेणी में आता है। वहीं, बल, धमकी, धोखे, प्रलोभन या छल से किसी व्यक्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाना व्यपहरण कहलाता है।
कार्यक्रम के दौरान टेली-मानस के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता एवं जागरूकता की जानकारी भी दी गई।
ब्लॉक स्तरीय प्रधानाध्यापक वाकपीठ में अधिकार मित्र घनश्याम माली एवं पैनल अधिवक्ता गौरव टेलर ने नालसा शिक्षा योजना 2026 के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना का उद्देश्य दिव्यांगता या अन्य कारणों से विद्यालय छोड़ चुके बच्चों को पुनः शिक्षा से जोड़ना है। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर, सामाजिक रूप से वंचित, विशेष आवश्यकता वाले तथा बाल श्रम, बाल विवाह, भेदभाव या अन्य कानूनी एवं सामाजिक बाधाओं के कारण शिक्षा से दूर हुए बच्चों को विद्यालय से जोड़ने के साथ उनके कानूनी अधिकारों और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
वक्ताओं ने कहा कि योजना का उद्देश्य केवल बच्चों का स्कूल में पुनः दाखिला करवाना नहीं है, बल्कि उनके शिक्षा के अधिकार, संरक्षण और न्याय तक पहुंच को भी मजबूत करना है। इस दौरान प्रधानाध्यापकों को साइबर फ्रॉड एवं साइबर दुर्व्यवहार से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में राजस्थान पुलिस के राजकॉप सिटीजन ऐप की जानकारी देते हुए इसके उपयोग के संबंध में भी जागरूक किया गया। ब्लॉक स्तरीय प्रधानाध्यापक वाकपीठ में करीब 150 अध्यापक मौजूद रहे। इस अवसर पर वाकपीठ समिति के भंवर सिंह, जितेंद्र सुवालका, मनोज बोहरा सहित अन्य शिक्षक एवं संबंधित सदस्य उपस्थित रहे। शिविर में ड्रॉपआउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के साथ उनके कानूनी अधिकारों, संरक्षण और न्याय तक पहुंच को लेकर जागरूकता पर जोर दिया गया।