चित्तौड़गढ़ निकाय चुनाव: 5 पर BJP और 2 पर कांग्रेस का कब्जा, अनिल ईनाणी बने सभापति
जिले की 7 निकायों में से चित्तौड़गढ़ और निम्बाहेड़ा नगर परिषद समेत 5 पर भाजपा विजयी रही, जबकि कांग्रेस ने नवगठित आकोला और बड़ीसादड़ी में बोर्ड बनाया।
तस्वीर में चित्तौड़गढ़ में गेंदे की बड़ी माला पहने एक व्यक्ति अन्य समर्थकों के साथ खड़ा है।
चित्तौड़गढ़ जिले की सात नगर निकायों में स्थानीय निकाय चुनाव के बाद बोर्ड गठन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। जिले के सियासी नतीजों में भारतीय जनता पार्टी का दबदबा सामने आया है। पांच निकायों में भाजपा ने बोर्ड बनाने के साथ सभापति और अध्यक्ष के पदों पर कब्जा जमाया, जबकि दो निकायों में कांग्रेस ने अपना बोर्ड बनाया। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की निकायों में इस बार राजनीतिक हलचल तेज रही। खास तौर पर पहली बार गठित आकोला नगर पालिका में कांग्रेस ने बोर्ड बनाकर इतिहास रचा।
जिले की दोनों प्रमुख नगर परिषद चित्तौड़गढ़ और निम्बाहेड़ा में भाजपा ने सभापति पद हासिल किया। चित्तौड़गढ़ नगर परिषद के कुल 60 वार्डों में भाजपा ने 33 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को 23 और निर्दलीयों को 4 सीटें मिलीं। सभापति पद पर भाजपा प्रत्याशी निर्वाचित हुए। 45 वार्ड वाली निम्बाहेड़ा नगर परिषद में भी भाजपा ने 27 वार्डों में जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया और अपना सभापति बनाया। यहां कांग्रेस को 17 और निर्दलीय को 1 सीट मिली।
जिले की पांच नगर पालिकाओं में से तीन पर भाजपा और दो पर कांग्रेस ने अध्यक्ष बनाए हैं। बेगूं में भाजपा ने बढ़त बनाते हुए बोर्ड का गठन किया और अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। कपासन में कांग्रेस के चार पार्षदों की क्रॉस वोटिंग, स्थानीय समीकरण और दो निर्दलीयों के सहयोग से भाजपा ने अपना अध्यक्ष निर्वाचित कराया। ऊर्जा नगरी रावतभाटा में कांटे की टक्कर के बीच अंतिम चरण के नतीजों और जोड़-तोड़ में भाजपा ने बाजी मारते हुए अपना अध्यक्ष बनाया।
सहकारिता मंत्री के गढ़ बड़ीसादड़ी में कांग्रेस समर्थित पार्षदों की जीत के साथ पार्टी ने स्पष्ट रणनीति के तहत अपना बोर्ड बनाया। पहली बार नगर पालिका के रूप में अस्तित्व में आई आकोला नगर पालिका में कांग्रेस ने पहला ऐतिहासिक बोर्ड बनाकर अपना अध्यक्ष निर्वाचित कराया। जिले के इन नतीजों में शहरी क्षेत्रों और बड़े केंद्रों में भाजपा का जनाधार मजबूत दिखाई दिया, जबकि कांग्रेस ने बड़ीसादड़ी और नवगठित आकोला निकाय में जीत दर्ज कर ग्रामीण परिवेश वाले इलाकों में अपनी पकड़ दर्ज कराई। भाजपा की जीत पर कार्यकर्ताओं में उत्साह नजर आया। कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी की और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर जश्न मनाया।
अनिल ईनाणी बने चित्तौड़ नगर परिषद सभापति
नगर परिषद सभापति पद के लिए सोमवार को हुए मतदान में भाजपा प्रत्याशी अनिल ईनाणी निर्वाचित हुए। अनिल ईनाणी को 36 मत मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी नगेंद्र सिंह राठौड़ के पक्ष में 24 मत पड़े। सभापति चुनाव को लेकर सुबह से ही नगर परिषद परिसर में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। नगर परिषद के 60 वार्डों के पार्षदों ने सुबह 10 बजे से मतदान शुरू किया।
भाजपा के 33 पार्षद और एक निर्दलीय पार्षद बस से सीधे मतदान स्थल पहुंचे। वहीं कांग्रेस के 19 पार्षद और एक निर्दलीय पार्षद कांग्रेस नेता सुरेंद्र सिंह जाड़ावत के साथ मतदान स्थल पहुंचे। पूर्व सभापति संदीप शर्मा के साथ तीन पार्षद मतदान केंद्र पहुंचे। इस प्रकार अनिल ईनाणी के पक्ष में भाजपा के 33 और तीन निर्दलीय, कुल 36 पार्षदों ने मतदान किया, जबकि कांग्रेस के नगेंद्र सिंह राठौड़ के पक्ष में कांग्रेस के 23 और एक निर्दलीय, कुल 24 पार्षदों ने मतदान किया।
मतदान को लेकर नगर परिषद परिसर और आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मतदान शुरू होने से पहले पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव ने मतदान स्थल का जायजा लिया। नगर परिषद के मुख्य द्वार पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह जोधा, डीएसपी ब्रजेश सिंह, कोतवाली थाना प्रभारी रजनीश कुमार, सदर थाना प्रभारी प्रेम सिंह, सीआई तुलसीराम सहित पुलिस का जाब्ता तैनात रहा।
परिणाम घोषित होते ही भाजपा खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की बधाई दी। इसके बाद भाजपा चुनाव कार्यालय पर कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर ढोल-नगाड़ों के साथ जीत का जश्न मनाया।
नवनिर्वाचित सभापति अनिल ईनाणी ने शहरवासियों और मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें सभापति चुने जाने के लिए वे सभी का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि शहरवासियों से मिलने वाले सुझावों को प्राथमिकता देते हुए सांसद सीपी जोशी और विधायक चंद्रभान सिंह आक्या के सहयोग से योजनाबद्ध तरीके से चित्तौड़गढ़ शहर के विकास और सौंदर्यीकरण के कार्य किए जाएंगे। ईनाणी ने अपनी जीत का श्रेय संगठन और पार्टी के कार्यकर्ताओं को दिया।
निंबाहेड़ा में अध्यक्ष पद का निर्विरोध निर्वाचन पूर्व में ही सम्पन्न
जिले में नगर निकाय चुनाव के तहत अध्यक्ष पद के निर्वाचन की प्रक्रिया सोमवार को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं सुव्यवस्थित रूप से सम्पन्न हुई। जिले की सातों नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद के परिणाम घोषित किए गए। इनमें पांच निकायों में भाजपा तथा दो निकायों में कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। निंबाहेड़ा नगर परिषद में अध्यक्ष पद का निर्वाचन पूर्व में ही निर्विरोध सम्पन्न हो चुका था, जबकि सोमवार को शेष छह नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद के लिए मतदान एवं मतगणना की प्रक्रिया सम्पन्न हुई।
निंबाहेड़ा नगर परिषद में श्रीमती शिल्पा भूतड़ा निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में अनिल ईनाणी भाजपा प्रत्याशी के रूप में कुल 60 में से 36 मत प्राप्त कर अध्यक्ष निर्वाचित हुए। बड़ीसादड़ी नगरपालिका में ममता कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में 25 में से 13 मत प्राप्त कर अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। कपासन नगरपालिका में सरोज देवी भाजपा प्रत्याशी के रूप में 25 में से 16 मत प्राप्त कर अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। रावतभाटा नगरपालिका में अनुसुइया नागर भाजपा प्रत्याशी के रूप में 40 में से 22 मत प्राप्त कर अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। बेगूं नगरपालिका में गरिमा शर्मा भाजपा प्रत्याशी के रूप में 35 में से 24 मत प्राप्त कर अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। वहीं, आकोला नगरपालिका में प्रकाश चंद्र कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में 20 में से 13 मत प्राप्त कर अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
सभापति तय होने के बाद उप-सभापति पद को लेकर घमासान
निकाय चुनाव में सभापति का चेहरा साफ होने के साथ ही उप-सभापति के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सभापति पद पर कब्जा जमाने के बाद राजनीतिक दलों में उप-सभापति पद के लिए भीतरखाने शह और मात का खेल शुरू हो चुका है। विभिन्न क्षेत्रों के पार्षद और उनके समर्थक शक्ति प्रदर्शन कर आलाकमान पर दबाव बनाने में जुट गए हैं।
उप-नगरीय क्षेत्र चंदेरिया के 11 वार्डों के आए नतीजों ने सभी को चौंकाया है। इनमें से 9 वार्डों पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों ने एकतरफा जीत दर्ज की है। इस प्रदर्शन को आधार बनाते हुए चंदेरिया क्षेत्र के पार्षदों और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर उप-सभापति पद चंदेरिया क्षेत्र को ही देने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई है। समर्थकों का तर्क है कि जिस क्षेत्र ने पार्टी की झोली में सबसे ज्यादा सीटें डाली हैं, राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पहला हक उसी क्षेत्र का बनता है।
भोलाराम प्रजापत के समर्थकों ने किया शक्ति प्रदर्शन
सभापति पद के मतदान के दौरान राजनीतिक पारा उस वक्त और चढ़ गया जब वार्ड संख्या 11 से निर्वाचित भाजपा पार्षद भोलाराम प्रजापत के समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए शक्ति प्रदर्शन किया। भोलाराम प्रजापत को उप-सभापति बनाने की मांग को लेकर उनके समर्थकों ने पार्टी नेताओं के समक्ष अपनी दावेदारी मजबूती से रखी। समर्थकों का कहना है कि प्रजापत की जनपैठ और जमीनी पकड़ को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
कई अन्य गुट भी मैदान में, क्रॉस वोटिंग की आशंका
केवल चंदेरिया ही नहीं, बल्कि कई अन्य वार्डों से जीतकर आए वरिष्ठ पार्षदों के समर्थकों ने भी अपनी-अपनी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है। उप-सभापति चुनाव को लेकर बन रहे समीकरणों के बीच असंतुष्ट पार्षदों की भूमिका अहम मानी जा रही है। भीतरघात और क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए प्रमुख राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
आज होने वाले उप-सभापति के मतदान को लेकर शहर का राजनीतिक पारा चरम पर है। सभापति पद के बाद अब उप-सभापति चुनाव को लेकर बन रहे नए समीकरणों पर सभी की नजरें टिकी हैं।