निकुंभ के चंदा माता मंदिर में 298वां भक्ति सत्संग, हरि प्रसाद नागदा को दी श्रद्धांजलि
बड़ी सादड़ी के निकुंभ स्थित चंदा माता मंदिर में 298वां भक्ति सत्संग हरि प्रसाद नागदा की छठवीं पुण्यतिथि पर हुआ। भजनों, दिव्य मंगल आरती, प्रसाद वितरण और सम्मान समारोह में परिवार व श्रद्धालु शामिल हुए।
तस्वीर में निकुंभ स्थित चंदा माता मंदिर परिसर में सत्संग परिषद की ओर से नंदलाल सालवी का अभिनंदन करते हुए लोग नजर आ रहे हैं।
बड़ी सादड़ी के निकुंभ कस्बे में पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध चंदा माता मंदिर में श्रीचंदा माता सत्संग सेवा परिषद के तत्वावधान में 298वां भक्ति सत्संग आयोजित किया गया। यह सत्संग मोक्षस्थ सत्संग प्रेमी हरि प्रसाद नागदा की छठवीं पुण्यतिथि पर उनके परिवारजनों की ओर से आयोजित किया गया।
परिषद के संयोजक प्रेम सिंह सिसोदिया ने बताया कि लाभार्थी परिवार की कुसुम देवी, गीता देवी, सीता देवी, उषा देवी, अनुप्रिया एवं चेल्सी सहित परिवारजनों ने भक्ति सत्संग में उपस्थित होकर माता रानी को नई पोशाक धारण करवाई और कांसे का प्रसाद वितरित किया।
दिव्य मंगल आरती में दैनिक भास्कर, पाली के वरिष्ठ पत्रकार माणक शर्मा भी उपस्थित रहे। भजन प्रवाहक रोडमल खाबिया ने हरि प्रसाद नागदा की स्मृति में भाव स्मरण श्रद्धांजलि भजन प्रस्तुत किया। भारत सिंह राठौड़ बिनोता ने "मेवाड़ी मान घट्यो कोनी, रण सूं रणधीर हट्यो कोनी, जो भी पंहुच्यो मां री शरण में, खाली हाथ गयो कोनी" भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
गिरधारी गंधर्व कन्नौज ने जीवन की क्षण भंगुरता पर आधारित "जिंदगी किराए का घर है, एक न एक दिन बदलना पड़ेगा" भजन की प्रस्तुति दी। सत्संग परिषद की ओर से लाभार्थी परिवार का अभिनंदन किया गया। यशवंत कंप्यूटर्स द्वारा माता रानी की छवि भेंट की गई।
नंदलाल सालवी द्वारा 41 दिवस की तपस्या पूर्ण करने पर सत्संग परिषद की ओर से उनका भावभीना अभिनंदन किया गया। प्रसाद वितरण एवं दिव्य मंगल आरती की व्यवस्था में रमेश कुमार कर्मठ, हंसराज पितलिया, किशन लाल लोहार, देवेंद्र कुमावत, सागरमल सुथार, देवीलाल सुथार, किशन लाल गुर्जर और प्रहलाद सुथार ने सहयोग दिया।
अतिथियों का आभार प्रबंधन समिति के सदस्य शौकीन पोरवाल ने जताया। प्रसाद वितरण लाभार्थी परिवार तथा प्रभावना नंदलाल सालवी परिवार की ओर से किया गया। इस अवसर पर आयोजित भक्ति सत्संग में हरि प्रसाद नागदा की स्मृति के साथ धार्मिक आयोजन की परंपरा और सेवा सहभागिता भी सामने आई।