चित्तौड़गढ़ में 21वां कल्याण महाकुंभ सम्पन्न, दिव्य दर्शन, 51 कुंडीय महायज्ञ और मातृ-पितृ पूजन बने आस्था का केंद्र
चित्तौड़गढ़ के श्री कल्ला जी वेदपीठ में 21वां कल्याण महाकुंभ दिव्य दर्शन, 51 कुंडीय महायज्ञ, मातृ-पितृ पूजन और श्री लिंग महापुराण कथा के साथ श्रद्धापूर्वक सम्पन्न हुआ।
तस्वीर में चित्तौड़गढ़ के श्री कल्ला जी वेदपीठ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सिंहासन पर विराजमान भानपुरा पीठ के शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज श्रद्धालुओं और सेवादारों की उपस्थिति में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
चित्तौड़गढ़ में मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्ला जी वेदपीठ का 21वां कल्याण महाकुंभ आषाढ़ कृष्ण अष्टमी बुधवार को वेदपीठ पर विराजित कल्याण नगरी के राजाधिराज ठाकुर श्री कल्ला जी सहित पंच देवों के प्राकट्योत्सव के पावन अवसर पर दिव्य दर्शन के साथ श्रद्धा और उत्साहपूर्वक सम्पन्न हो गया। महाकुंभ के अंतिम दिन स्वर्ण-रजत जड़ित श्रृंगार में ठाकुर जी की अनुपम और मनोहारी छवि श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। दोपहर ठीक 12:32 बजे सामूहिक शंखनाद, ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और ठाकुर जी के गगनभेदी जयघोष के बीच जैसे ही मंदिर के गर्भगृह का परदा खुला, रजत पावासन पर स्वर्ण-रजत आभा से सुशोभित ठाकुर श्री कल्ला जी के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए उमड़े हजारों श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ अपने आराध्य के दर्शन किए। इस दौरान आयोजित महाआरती का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। मेवाड़, मालवा, वागड़, गुजरात, मारवाड़, हाड़ौती सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कल्याण भक्तों ने अपने आराध्य के दर्शन कर स्वयं को धन्य बताया। सतरंगी फूलों की झांकी के बीच ठाकुर जी के मनोहारी श्रृंगार के दर्शन कर भानपुरा पीठ के शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ सहित दूर-दराज से आए कल्याण सेवकों और गादीपतियों ने कहा कि वास्तव में कल्याण नगरी के राजाधिराज के ठाठ निराले हैं। महाआरती से लेकर शयन आरती तक पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। दिव्य दर्शन से पूर्व वेदपीठ पर जगन्नाथ पुरी से लाई गई पावन ध्वजाओं की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की गई और ठाकुर जी के जयघोष तथा आतिशबाजी के बीच ध्वजारोहण सम्पन्न हुआ।
महाकुंभ के अंतिम दिन वेदपीठ की परंपरा के अनुसार आयोजित सामूहिक मातृ-पितृ पूजन की भानपुरा पीठ के शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि वेदपीठ द्वारा सनातन संस्कृति को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से आयोजित यह आयोजन सम्पूर्ण समाज के लिए अनुकरणीय तथा भावी पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मातृ-पितृ पूजन के साक्षी बनते हुए स्वयं को गणेश मानकर शिव-पार्वती स्वरूप माता-पिता की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की और उनकी परिक्रमा की। यह दृश्य कैलाश पर विराजित भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश के प्रसंग को सजीव करता नजर आया। इस दौरान पंडित प्रहलाद कृष्ण एवं उनके साथियों ने माता-पिता की महिमा का वर्णन करते हुए अपनी गायन प्रस्तुति में ‘मां-बाप को मत भूलना’ भजन प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
महाकुंभ के अंतर्गत आयोजित 51 कुंडीय श्री अतिरूद्र महायज्ञ बुधवार को पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न हुआ। पंच दिवसीय महाकुंभ के दौरान लगभग 1500 यजमान युगलों ने गोघृत एवं शाकल्य की लगभग सवा तीन करोड़ आहुतियां देकर ब्रह्मा, विष्णु, महेश सहित ब्रह्मांड के समस्त देवी-देवताओं को प्रसन्न करने तथा सर्वत्र खुशहाली और अच्छी वर्षा की कामना की।
21वें कल्याण महाकुंभ के अंतर्गत आयोजित श्री लिंग महापुराण कथा के अष्टम दिवस कथा के अंतिम चरण में भानपुरा पीठाधीश्वर परम पूज्य शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज ने भगवान शिव के लिंग स्वरूप की महिमा का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्री लिंग महापुराण के अनुसार समस्त सृष्टि, समस्त देवता तथा चर-अचर जगत शिवलिंग में ही प्रतिष्ठित हैं। भगवान महेश्वर का प्रत्यक्ष भौतिक स्वरूप शिवलिंग है, इसलिए प्रत्येक श्रद्धालु को श्रद्धा और विधि-विधान से शिवलिंग की स्थापना, प्रतिष्ठा तथा पूजा-अर्चना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवलिंग की उपासना समस्त देवी-देवताओं की उपासना के समान फलदायी मानी गई है। स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज ने बताया कि शिवलिंग में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र, वरुण, यम, कुबेर, ईशान, लक्ष्मी, दुर्गा, गणपति, नंदी, स्कंद, पितृगण, ऋषिगण, आदित्य, वसु, अश्विनी कुमार, विश्वदेव, दिग्पाल सहित समस्त देवशक्तियां प्रतिष्ठित हैं। ब्रह्मा से लेकर स्थावर-जंगम समस्त सृष्टि शिवलिंग में समाहित है। इसलिए शिवलिंग की स्थापना और पूजा करने वाला साधक समस्त पूजनीय देवताओं की आराधना का पुण्य प्राप्त करता है तथा आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि लिंग स्थापना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ने का माध्यम है। श्रद्धा, भक्ति और विधिपूर्वक की गई शिवलिंग की अर्चना मनुष्य के जीवन को मंगलमय बनाती है और उसे शिव कृपा का अधिकारी बनाती है।
कथा के समापन पर शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज ने श्री कल्लाजी वेदपीठ द्वारा 21वें कल्याण महाकुंभ के अंतर्गत आयोजित आठ दिवसीय धार्मिक आयोजनों की सराहना करते हुए कहा कि वेदपीठ द्वारा आयोजित 51 कुंडीय महायज्ञ केवल क्षेत्र ही नहीं बल्कि समस्त ब्रह्मांड के कल्याण और लोकमंगल का महान पुण्य कार्य है। उन्होंने कहा कि यज्ञ में हवन करने से समस्त देवी-देवताओं की प्रसन्नता के साथ अच्छी वर्षा होती है, जिससे अन्न की उत्पत्ति होती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को यज्ञ की महत्ता स्वीकार करते हुए पूर्ण मनोभाव से आहुतियां देकर ईश्वरीय कृपा प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे वैदिक अनुष्ठानों से धर्म, संस्कृति और सनातन परंपरा को नई ऊर्जा मिलती है तथा इसका पुण्य अत्यंत महान और कल्याणकारी है। उन्होंने वेदपीठ के स्तुत्य प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ठाकुर जी के नित नए अनुष्ठानों के फलस्वरूप यह नगर कल्याण नगरी का स्वरूप लेता जा रहा है।
महाकुंभ के सप्तम दिवस की रात्रि में कथा मंडप भक्ति रस से सराबोर हो उठा। संध्या महाआरती के बाद मारवाड़ के प्रसिद्ध भजन गायक महावीर सांखला एवं उनकी मंडली ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को देर रात तक भक्तिमय वातावरण में बांधे रखा। भजन संध्या का शुभारंभ देशभक्ति से ओतप्रोत भजन ‘भारत म्हारो देश, फूटरो वेश, धन-धन भारती’ से हुआ। इसके बाद ‘बोलो जय-जयकार’, ‘उतारो आरती’, ‘सोने री चिड़कली रे’, ‘प्यारो म्हारो देश रो’, ‘म्हारा हांसला’ तथा ‘महाराणा प्रताप कटे’ जैसे लोकप्रिय भजनों की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का संचार किया। श्रद्धालु भजनों पर झूम उठे और पूरा कथा मंडप जयकारों से गूंज उठा। भजन संध्या के दौरान ठाकुर श्री कल्लाजी सहित देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान किया गया। देर रात तक चले इस भक्ति कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भक्तिमय वातावरण का आनंद लिया। इस प्रकार दिव्य दर्शन, वैदिक अनुष्ठानों, मातृ-पितृ पूजन, महायज्ञ, श्री लिंग महापुराण कथा और भजन संध्या के साथ 21वां कल्याण महाकुंभ श्रद्धा और उत्साहपूर्वक सम्पन्न हो गया।