तस्वीर में बड़ी सादड़ी स्थित भवन के बाहर एकत्र होकर खड़े लोग नजर आ रहे हैं।

बड़ी सादड़ी के समता भवन में विगत 49 दिनों से चल रही प्रवचन श्रृंखला में शासन दीपक निश्चल मुनि आदि ठाणा-2 ने श्रावकों को संबोधित करते हुए कहा कि महापुरुषों का जीवन चरित्र पढ़कर मानव अपने जीवन में शील, तप और दान का महत्व समझ सकता है। भगवान महावीर और श्रीकृष्ण महाराज के चरित्र से जीवन जीने की राह मिलती है।

सनातन श्रावक चांदमल खोईवाल मिन्नाणा ने बताया कि मुनि श्री ने वर्तमान की एकल परिवार व्यवस्था में माता-पिता के प्रति बढ़ते उपेक्षा भाव को समाज के लिए बहुत बड़ा दुर्भाग्य बताया। उन्होंने वृद्धाश्रम और अनाथालय की अवधारणा को भविष्य के लिए खतरा बताते हुए कहा कि मानव जीवन में माता-पिता की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। उन्होंने महापुरुषों की शिक्षाओं पर चिंतन-मनन करने का आवाह्न किया।

प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने कन्या भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध के साथ विभिन्न सामाजिक कार्यों में दिखावे की संस्कृति और फिजूलखर्ची पर भी श्रावकों का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि बुराइयों से बचकर स्वच्छ और स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सकता है। मानव अपने जीवन में श्रेष्ठ व्यवहारिक ज्ञान का उपयोग करके अपने जीवन को संवार सकता है।

मुनि श्री ने वर्तमान की मोबाइल संस्कृति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मोबाइल संस्कृति से युवा वर्ग भटकाव के रास्ते पर आगे बढ़ा है। जीवन में कर्म की प्रधानता को प्राथमिकता प्रदान कर हम महापुरुषों के प्रति कृतज्ञ बने रह सकते हैं।

इस अवसर पर संत वंदन एवं सुख साता की कामना श्रावक दिलीप कुमार सहलोत ने की। प्रभावना महावीर कुमार गौरव कुमार मेहता की ओर से वितरित की गई। तपस्वी श्रावक नंदलाल सालवी के 37 दिवस निरंतर तप तपस्या का हर्ष अनुमोदना के साथ धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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