तस्वीर में चित्तौड़गढ़ के समिति कक्ष में जिला कलक्टर डॉ. मंजू और अन्य अधिकारियों के साथ भामाशाह सम्मान समारोह के दौरान प्रशस्ति पत्र देते हुए नजर आ रहे हैं।

चित्तौड़गढ़। शिक्षा के मंदिरों को समृद्ध करना ही सच्ची सेवा है। विद्यालयों के विकास के लिए हर संभव सहयोग करने वाले भामाशाहों का योगदान अतुलनीय है। यह बात जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने मंगलवार को समिति कक्ष में शिक्षा के क्षेत्र में दान करने वाले भामाशाहों के सम्मान समारोह में कही। उन्होंने भामाशाहों की इस भावना को अभिनंदनीय बताया कि समाज से बहुत कुछ मिला है और अब समाज को कुछ देने की भावना भी होनी चाहिए।

जिला कलक्टर ने राशमी तहसील के देवीपुरा गांव की 80 वर्षीय मांगी बाई अहीर के समर्पण को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि ऐसे उदाहरण समाज को प्रेरणा देते हैं। मांगी बाई का जीवन शिक्षा के प्रति समर्पण की ऐसी मिसाल बन गया है, जिसमें उन्होंने विद्यालय को मंदिर और बच्चों को भगवान मानते हुए विद्यालय विकास के लिए 15 लाख रुपए दान किए।

मांगी बाई की कोई बेटा-बेटी नहीं है और वह स्वयं निरक्षर हैं। विधवा मांगी बाई वर्तमान में अपने भतीजे देवीलाल अहीर के साथ रहती हैं। गांव के बच्चों की जिंदगी शिक्षा से रोशन हो, इसी भावना ने उन्हें यह संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया। पहले धार्मिक कार्यों में दान करने वाली मांगी बाई ने अब शिक्षा को ही सबसे बड़ी सेवा मान लिया है। उन्होंने विद्यालय में पानी की टंकी, एक कक्षाकक्ष और सरस्वती मंदिर के निर्माण सहित विभिन्न कार्यों के लिए सहयोग दिया। उनका मानना है कि गांव के बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और आगे बढ़ें, इससे बड़ी खुशी उनके लिए कुछ नहीं है।

मांगी बाई के शिक्षा के प्रति समर्पण को समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बताते हुए जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने शिक्षा विभाग में भामाशाहों को प्रोत्साहित करने के लिए हर माह आठ भामाशाहों के सम्मान की पहल की है। इसी क्रम में मंगलवार को समिति कक्ष में जिला कलक्टर ने दान करने वाले भामाशाहों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

भादसोड़ा के मूल निवासी और अमेरिका में रह रहे एनआरआई डॉ. मुस्तफा ने गांव के बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के लिए करीब 18 लाख रुपए का सहयोग किया। उन्होंने कम्प्यूटर लैब, शिक्षकों की व्यवस्था, इन्वर्टर, सीसीटीवी सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ विद्या क्रांति फाउंडेशन बनाया है, जो क्षेत्र के विद्यालयों के विकास के लिए काम करेगा।

वहीं राउप्रावि मडावदा की स्कूल प्रबंधन समिति ने 150 घरों वाले गांव के प्रत्येक परिवार को विद्यालय से जोड़ा और करीब 5 लाख रुपए जुटाकर स्कूल का विकास कराया। आज यह विद्यालय निजी स्कूलों को टक्कर दे रहा है। ग्रामीणों की मांग पर जिला कलक्टर ने खेल मैदान के लिए भूमि प्रबंधन, बालिका शौचालय और स्मार्ट बोर्ड के प्रस्ताव सीएसआर से स्वीकृत कराने के निर्देश दिए।

मोरवन के प्रकाश टेलर ने 1.50 लाख रुपए, डूंगला के सेवानिवृत्त व्याख्याता नरेश कुमार मालू ने 1.11 लाख रुपए, जाशमा के सम्पतलाल बोरदिया ने 1 लाख रुपए तथा सेवानिवृत्त अध्यापिका तुलसी जोशी और सुदरी के प्रहलाद जाट ने 51-51 हजार रुपए विद्यालय विकास के लिए दिए। सभी का भामाशाह के रूप में सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में प्रशिक्षु आईएएस रविन्द्र मेघवाल, मुद्रा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद दशोरा, डाइट प्रधानाचार्य राजेंद्र कुमार शर्मा, समसा के एडी नरेन्द्र सिंह चौहान, एसीपी दीनदयाल नारायणीवाल, पीओ शिवकुमार चावला, विनोद कुमार मुंदडा, संदर्भ व्यक्ति चित्तौड़गढ़ ब्लॉक डॉ. विकास अग्रवाल, हेमेन्द्र सोनी सहित अन्य उपस्थित रहे। शिक्षा के क्षेत्र में इन भामाशाहों का सहयोग विद्यालयों के विकास और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में सामने आया।

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