तस्वीर में बड़ी सादड़ी के जैन दिवाकर प्रवचन हॉल में धर्मसभा के दौरान सहकारिता मंत्री गौतम दक और कांग्रेस नेता बद्री लाल जाट महाराज श्री के सान्निध्य में बैठे नजर आ रहे हैं।

बड़ी सादड़ी में नगरपालिका चुनाव की सरगर्मियों और व्यस्ततम कार्यक्रमों के बीच धार्मिक सौहार्द की तस्वीर देखने को मिली। जैन दिवाकर प्रवचन हॉल में पर्युषण पर्व के द्वितीय दिवस आयोजित गुणानुवाद सभा में राजस्थान सरकार के सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन मंत्री गौतम दक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व विधानसभा प्रत्याशी बद्री लाल जाट एक साथ पहुंचे और गुरुणीवर्या महासाध्वी अपर्ण प्रज्ञा मसा आदि ठाणा के मार्मिक एवं मंगल प्रवचन, दर्शन एवं मांगलिक श्रवण का लाभ लिया।

धर्मसभा में दोनों ही दलों के नेता स्वामी सुदर्शनाचार्य जी महाराज और अनंत राम जी महाराज का भी आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। चुनावी व्यस्तता के बावजूद क्षेत्र के दोनों प्रमुख राजनीतिक जनप्रतिनिधियों का एक साथ धर्मसभा में पहुंचना धार्मिक आयोजनों में सौहार्द का अवसर बना।

चुनावी माहौल के बीच धर्मसभा में पहुंचे दोनों जनप्रतिनिधियों ने एक-दूसरे के उद्बोधन और विचारों को भी बेहद ध्यानपूर्वक सुना। दोनों नेताओं ने राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और आरोप-प्रत्यारोप को एक तरफ रखते हुए गुरुणीवर्या महासाध्वी के श्रीमुख से धर्म, शाकाहार, माता-पिता के उपकारों और क्षमावाणी के महत्व को सुना तथा इन्हें जीवन में उतारने का प्रयत्न किया। दोनों प्रमुखों ने अपने उद्बोधन के माध्यम से पर्वराज पर्युषण पर उपस्थित सभी श्रावक-श्राविकाओं को शुभ एवं मंगलकामनाएं दीं।

आयोजित प्रवचन सभा में महासाध्वी अपर्ण प्रज्ञा ने कहा कि प्रभु कृष्ण रोजाना पाँच सौ माताओं के चरण स्पर्श करते थे। उन्होंने कहा कि आज स्वयं के माता-पिता को प्रणाम करने में भी शर्म महसूस होती है। आगे उन्होंने कहा कि जीवन में चाहे कितनी भी व्यस्तता हो और सामाजिक दायित्व हों, फिर भी धर्म और नैतिक मूल्यों का पालन ही मनुष्य को सही मार्ग और राह दिखाता है।

राजनीतिक व्यस्तता के बीच समय निकालकर धर्मसभा में पहुंचे दोनों प्रमुख दलों के राजनेताओं का श्री संघ द्वारा आत्मिक अभिनंदन किया गया। प्रवचन सभा में तपस्या के प्रत्याख्यान भी हुए। मोहित मेहता "मोनू" और ज्योति नागौरी ने आठ उपवास के प्रत्याख्यान लिए।

प्रवचन सभा में विभिन्न वार्डों से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों ने भी दर्शन, प्रवचन एवं मांगलिक श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त किया। इस तरह चुनावी व्यस्तताओं के बीच धर्मसभा में दोनों प्रमुख दलों के जनप्रतिनिधियों की एक साथ उपस्थिति पर्युषण पर्व के आयोजन में आध्यात्मिक और सौहार्दपूर्ण वातावरण का प्रमुख दृश्य बनी।

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