तस्वीर में कथावाचक और श्रद्धालु भगवान की झांकी के समीप खड़े दिख रहे हैं।   

बड़ी सादड़ी नगर के दिव्य आनंद धाम रामद्वारा में पितृपक्ष के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का गुरुवार रात समापन हुआ। अंतिम दिन भगवान को 56 भोग अर्पित किए गए और अन्नकूट महोत्सव मनाया गया। इस दौरान स्वामी अनंतराम महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और सुदामा चरित्र के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रेम, सच्ची मित्रता, सामाजिक समानता और सदाचार का संदेश दिया।

कथा के अंतिम दिन स्वामी अनंतराम महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह, जरासंध वध, नरकासुर वध और सुदामा चरित्र सहित कई प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने सुदामा चरित्र के माध्यम से सच्ची मित्रता, सामाजिक समानता और प्रेम का महत्व बताया। स्वामी अनंतराम ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन जीने की कला सिखाती है। इसके आदर्शों को अपनाने से व्यक्ति धर्म और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ता है।

स्वामी अनंतराम महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए क्रोध पर नियंत्रण रखने और सदाचार अपनाने की सीख दी। उन्होंने कहा कि क्रोध कई दुखों की जड़ है और क्रोध आने पर व्यक्ति को मौन रहना चाहिए। अच्छे कार्य करने में देर नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने युवाओं से समाज में फैले अत्याचार, अनाचार, कटुता और व्यभिचार जैसी बुराइयों को दूर करने की अपील की। साथ ही सुंदर और संस्कारवान समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर नगर पालिका उपाध्यक्ष रणजीत सिंह झाला ने घोषणा की कि अगले साल श्राद्ध पक्ष में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन वह अपने निजी खर्चे पर करवाएंगे।

कथा के समापन पर भगवान को 56 भोग अर्पित किए गए। इसके बाद श्रद्धालुओं में छप्पन भोग का प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन के दौरान कथा में उल्लेखनीय सेवा देने वाले सभी श्रद्धालुओं का ऊपरना, शाल और माला पहनाकर स्वागत किया गया। धार्मिक आयोजनों के साथ कथा में दिए गए सदाचार, प्रेम और सामाजिक समरसता के संदेश ने कार्यक्रम को समापन तक विशेष स्वरूप प्रदान किया।

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