चंद्रपुर में जमीन हस्तांतरण की मांग को लेकर राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने ज्ञापन सौंपा।   

चंद्रपुर में अन्य पिछड़ा बहुजन कल्याण विभाग के सरकारी छात्रावासों और प्रशासनिक संकुल के लिए आरक्षित तीन एकड़ सरकारी जमीन का हस्तांतरण अब तक नहीं होने पर विवाद गहरा गया है। राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने जिला प्रशासन पर जानबूझकर लापरवाही बरतने और ओबीसी विद्यार्थियों व समाज के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 10 दिनों में जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अन्नत्याग आंदोलन किया जाएगा।

राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के महासचिव सचिन राजुरकर ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया कि स्थानीय जनप्रतिनिधि के दबाव के कारण जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया लंबित है। उन्होंने कहा कि राजस्व मंत्री द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग उपसमिति की बैठक में निर्देश दिए जाने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर इस मामले की अनदेखी की जा रही है।

अन्य पिछड़ा बहुजन कल्याण विभाग के सरकारी लड़कों और लड़कियों के छात्रावासों के निर्माण के लिए पशुपालन एवं दुग्ध व्यवसाय विकास विभाग के 30 जुलाई 2025 के शासन निर्णय के अनुसार डेढ़-डेढ़ एकड़ के हिसाब से कुल तीन एकड़ जमीन राजस्व विभाग को समर्पित की गई थी। इस जमीन को छात्रावास निर्माण के लिए अन्य पिछड़ा बहुजन कल्याण विभाग के सहायक संचालक के नाम आवंटित किया जाना था।

निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमीन की माप कराई गई और सहायक संचालक ने 30-10-2025 को आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसके बाद बार-बार बताई गई कमियों की पूर्ति भी की गई, लेकिन इसके बावजूद अब तक जमीन अन्य पिछड़ा बहुजन कल्याण विभाग के नाम हस्तांतरित नहीं की गई है।

महासंघ का आरोप है कि राजस्व मंत्री के निर्देशों के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर जानबूझकर उदासीनता बरती जा रही है। इससे ओबीसी विद्यार्थियों के लिए छात्रावास निर्माण और समाज से जुड़े प्रशासनिक संकुल के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। महासंघ ने प्रशासन से 10 दिनों के भीतर इस मामले में कार्रवाई पूरी करने की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अन्नत्याग आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

ज्ञापन सौंपते समय राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के कार्याध्यक्ष दिनेश चोखारे, चंद्रपुर महानगरपालिका की स्थायी समिति की सभापति तथा महिला महासंघ की शहर अध्यक्ष मनस्वी गिऱ्हे, राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के जिलाध्यक्ष रामदास कामडी, ओबीसी योद्धा रवींद्र टोंगे, सुधाकर काकडे, नगरसेविका तथा महिला महासंघ की महासचिव मनीषा बोबडे, भाऊराव बोढाले, सतीश भिवगडे, सुहास पानघाटे, आकाश लोंढे, अक्षर येरगुडे, अशोक अक्केवार, श्याम राजूरकर और विपीन देऊळकर उपस्थित थे।

सचिन राजुरकर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि स्थानीय जनप्रतिनिधि के दबाव में आकर जिला प्रशासन ने ओबीसी विभाग को जमीन हस्तांतरित नहीं की है। उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज के साथ जानबूझकर होने वाला अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि 10 दिनों में इस संबंध में निर्णय नहीं लिया गया, तो वह स्वयं अन्नत्याग अनशन पर बैठेंगे। अब जमीन हस्तांतरण को लेकर जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर महासंघ की नजर रहेगी।

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