औरंगाबाद हत्याकांड में छह दोषियों को उम्रकैद, जिला जज ने सुनाई सजा, पीड़ित पक्ष को प्रतिकर के निर्देश

औरंगाबाद के किशुनपुरा हत्याकांड में छह दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। जानिए अदालत के फैसले, मामले की पूरी समयरेखा और अहम कानूनी कार्रवाई।

Update: 2026-07-30 12:08 GMT

तस्वीर में औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय का मुख्य प्रवेश द्वार और परिसर के बाहर आवाजाही करते लोग नजर आ रहे हैं।

औरंगाबाद के व्यवहार न्यायालय में जिला जज 5वें उमेश प्रसाद ने हसपुरा थाना के एक कांड में सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए छह अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एपीपी देवीनंदन सिंह ने बताया कि थाना क्षेत्र के किशुनपुरा गांव निवासी प्राथमिक अभियुक्त छोटेलाल कुमार, अजीत कुमार, रोहित कुमार, मनोज कुमार, गुड्डू कुमार और सुरेन्द्र सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास तथा 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा धारा 147 के तहत दो वर्ष के कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने से भी दंडित किया गया है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

एपीपी ने बताया कि अभियुक्त छोटेलाल कुमार घटना के समय से ही जेल में बंद हैं, जबकि अन्य अभियुक्तों को भी 20 जुलाई को दोषी ठहराए जाने के बाद उनका बंधपत्र विखंडित कर जेल भेज दिया गया था। न्यायालय ने पीड़ित पक्ष को प्रतिकर दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद को आवश्यक निर्देश भी दिए हैं।

मामले के अनुसार, किशुनपुरा गांव निवासी उषा देवी ने 15 जून 2023 को अभियुक्तों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि 10 जून 2023 की रात करीब 8 बजे अभियुक्त उनके नाली का पाटन चुरा रहे थे। इसका विरोध उनके पति तपेश्वर सिंह ने किया तो अभियुक्तों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियार से उन पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के बाद तपेश्वर सिंह का पटना के एक अस्पताल में मस्तिष्क का ऑपरेशन कराया गया, लेकिन घटना के 11 दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई। न्यायालय में मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाहों की गवाही कराई गई, जबकि अभियुक्तों के विरुद्ध 30 जनवरी 2024 को आरोप गठन किया गया था। सजा के साथ न्यायालय ने पीड़ित पक्ष के प्रतिकर के लिए भी आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

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