कांग्रेस में गुटबाजी की नई पटकथा? 28 साल पुराने नेता पर पार्टी विरोधी रणनीति के आरोप
गंगापुर-भीलवाड़ा में नगरपालिका चुनाव से पहले कांग्रेस की गुटबाजी चर्चा में है। 28 साल पुराने नेता पर पार्टी विरोधी रणनीति के आरोप लगे हैं।
गंगापुर-भीलवाड़ा में नगरपालिका चुनाव की सरगर्मियां तेज होने के साथ कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और आपसी खींचतान की चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगी हैं। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, पार्टी में करीब 28 वर्षों से सक्रिय एक नेता पर आगामी स्थानीय निकाय चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में सक्रिय होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि उक्त नेता अपने राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए अलग रणनीति बनाने में जुटा है और इसके लिए भाजपा के कुछ नेताओं से नजदीकियां बढ़ाने की चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में गर्म हैं।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, करीब 28 वर्षों से पार्टी की राजनीति में सक्रिय बताए जा रहे इस नेता की भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर ही सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि नेता अपनी ही पार्टी के उन नेताओं और उनके समर्थकों को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिनका क्षेत्र में जनाधार माना जाता है। सूत्रों का कहना है कि इसके लिए निजी कार्यालय में बैठकों और राजनीतिक रणनीति तैयार किए जाने का सिलसिला शुरू हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक, नगरपालिका चुनाव को लेकर पार्टी के भीतर टिकट वितरण और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन के बीच गुटीय समीकरण साधने की कोशिशें तेज हो गई हैं। आरोप यह भी है कि कांग्रेस के प्रभावशाली स्थानीय नेताओं के समर्थकों को भाजपा के साथ राजनीतिक तालमेल के जरिए चुनावी मैदान में कमजोर करने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है।
कांग्रेस के कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि पार्टी के भीतर से ही अलग-अलग गुट अपने व्यक्तिगत राजनीतिक हितों के लिए काम करेंगे तो इसका सीधा असर आगामी नगरपालिका चुनाव के परिणामों पर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं के एक वर्ग का मानना है कि टिकट वितरण में पारदर्शिता और सभी गुटों को साथ लेकर चलना पार्टी के लिए बेहद जरूरी होगा।
कांग्रेस सूत्रों ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व में भी उक्त नेता की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर पार्टी के अंदर नाराजगी रही है। सूत्रों का दावा है कि विधानसभा चुनावों के दौरान भी पार्टी के भीतर मतभेदों और कथित समानांतर राजनीतिक गतिविधियों का कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा तथा पार्टी को हजारों मतों का नुकसान होने की चर्चा रही है।
सूत्रों के अनुसार, उक्त नेता स्वयं कई बार वार्ड स्तर का चुनाव जीतने में सफल नहीं रहा, बावजूद इसके पार्टी की अंदरूनी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की कोशिश करता रहा है। विरोधी गुट का आरोप है कि लंबे समय से पार्टी के भीतर रहते हुए भी उसकी गतिविधियां कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के बजाय गुटीय समीकरणों को बढ़ावा देने वाली रही हैं।
वहीं, बाड़ेबंदी और चुनावी प्रबंधन को लेकर भी कांग्रेस के कुछ नेताओं के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सूत्रों ने आरोप लगाया कि पूर्व में बहुमत के बावजूद पार्षदों की खरीद-फरोख्त और चुनावी बाड़ेबंदी के दौरान होटल बिलों और खर्चों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज या स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है, इसलिए इन्हें फिलहाल राजनीतिक आरोपों के रूप में ही देखा जा रहा है।
नगरपालिका चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को नियंत्रित करना और संभावित प्रत्याशियों को एकजुट रखना होगी। यदि व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते पार्टी के भीतर ही एक-दूसरे को कमजोर करने का खेल जारी रहा तो इसका फायदा सीधे विपक्षी दलों को मिल सकता है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व को स्थानीय स्तर पर चल रही गतिविधियों पर नजर रखकर समय रहते सभी गुटों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाना चाहिए। साथ ही टिकट वितरण में पार्टी के प्रति निष्ठा, जनाधार और जीत की संभावना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि स्थानीय निकाय चुनाव में अंदरूनी कलह कांग्रेस के लिए राजनीतिक नुकसान का कारण न बने।