भीलवाड़ा में 11 से 17 नवंबर तक भागवत कथा महोत्सव, वृंदावन के आचार्य महेंद्र कृष्ण शास्त्री करेंगे कथा वाचन
छोटी हरणी के काठियाबाबा आश्रम में 11 से 17 नवंबर तक आयोजित कथा से पहले कलश शोभायात्रा निकाली जाएगी, श्रद्धालुओं के लिए विशाल पांडाल बनाया जा रहा है।
भीलवाड़ा में श्रद्धा और भक्ति का विशेष आयोजन होने जा रहा है। छोटी हरणी स्थित हनुमान टेकरी के श्री टेकरी के बालाजी काठियाबाबा आश्रम में 11 से 17 नवंबर तक श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इसमें वृंदावन के प्रख्यात कथावाचक एवं गौरक्षक आचार्य महेंद्र कृष्ण शास्त्री व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को सात दिनों तक श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण कराएंगे।
धर्मनगरी भीलवाड़ा में आयोजित होने वाले इस महोत्सव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। कार्यक्रम महंत बनवारीशरण काठियाबाबा के सानिध्य में होगा। कथा का वाचन प्रतिदिन दोपहर 1 से शाम 5 बजे तक किया जाएगा। आयोजन के सूत्रधार महंत बनवारीशरण काठियाबाबा ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा के शुभारंभ से पहले श्रद्धा और आस्था के साथ कलश शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें सैकड़ों महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण कर शामिल होंगी।
कथा के आयोजन के लिए मंदिर परिसर में विशाल पांडाल का निर्माण कराया जा रहा है, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था रहेगी। इसके साथ ही कथा से संबंधित सभी आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं। कथा स्थल के बाहर और मुख्य मार्ग पर स्वागत द्वार लगाने के लिए विशेष सजावट की जा रही है। आयोजन को व्यवस्थित और सफल बनाने के लिए विभिन्न कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक प्रसंगों का वाचन किया जाएगा। पहले दिन 11 नवंबर को व्यासपीठ पर श्रीमद् भागवत की स्थापना के साथ श्रीमद् भागवत महात्म्य, व्यास-नारद संवाद और कुंती स्तुति प्रसंग सुनाए जाएंगे। दूसरे दिन 12 नवंबर को कपिल-देवहूती संवाद, सती चरित्र और ध्रुव चरित्र का वाचन होगा।
13 नवंबर को जड़भरत संवाद, नृसिंह अवतार और वामन अवतार के प्रसंग सुनाए जाएंगे। 14 नवंबर को श्रीराम एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन होगा। वहीं, 15 नवंबर को श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग के प्रसंगों का वाचन किया जाएगा।
इसी क्रम में 16 नवंबर को उद्धव चरित्र, रुक्मणी मंगल और रास पंचाध्यायी प्रसंग सुनाए जाएंगे। कथा के अंतिम दिन 17 नवंबर को द्वारिका लीला, सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वाचन होगा। इसके बाद व्यास पूजन और पूर्णाहुति के साथ सात दिवसीय कथा महोत्सव का समापन किया जाएगा।
महंत बनवारीशरण काठियाबाबा ने बताया कि इस धार्मिक आयोजन का लाभ भीलवाड़ा के अधिकाधिक धर्मप्रेमियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। इसके लिए तैयारियां व्यापक स्तर पर की जा रही हैं, ताकि श्रद्धालु सातों दिन आयोजित होने वाली कथा में शामिल होकर विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का श्रवण कर सकें।