भीलवाड़ा में आधी रात घर में घुसी पुलिस, मां-बेटे से मारपीट का आरोप, महिला हुई बेहोश
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से जुड़े विवाद के बाद पुर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली और बिना महिला पुलिस के देर रात घर में घुसने पर उठे सवाल।
भीलवाड़ा के पुर थाना क्षेत्र के खोलपुरा में आधी रात को घर में घुसकर मां-बेटे के साथ मारपीट करने का पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित परिवार के अनुसार, रात करीब 11 बजे पुलिस की गाड़ी लेकर पहुंचे तीन-चार पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर लाठी-डंडों से घर का दरवाजा तोड़कर प्रवेश किया और नारायण लाल गाडरी तथा उनकी माता गीता देवी गाडरी के साथ मारपीट की। इस दौरान गीता देवी की हालत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गईं। घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली और कार्रवाई के तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पीड़ित नारायण लाल गाडरी के अनुसार, वह अपनी माता गीता देवी गाडरी के साथ घर में सो रहे थे। इसी दौरान रात करीब 11 बजे पुर थाना पुलिस की एक गाड़ी उनके घर के बाहर आकर रुकी। आरोप है कि गाड़ी में तीन-चार पुलिसकर्मी मौजूद थे। उन्होंने लाठी-डंडों से दरवाजा तोड़कर घर में प्रवेश किया और अंदर आते ही मां-बेटे के साथ मारपीट शुरू कर दी।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि मारपीट के दौरान गीता देवी गाडरी की हालत गंभीर हो गई और वह बेहोश हो गईं। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के समय मौके पर कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। देर रात घर में प्रवेश करने और महिला के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
नारायण लाल गाडरी ने इस कार्रवाई को सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि वीडियो में कथित तौर पर जली हुई वोटिंग पर्चियां दिखाई दे रही थीं। पीड़ित के अनुसार, उन्होंने उस वीडियो में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया था। इसके बावजूद उनके घर पहुंचकर मारपीट किए जाने का आरोप है। हालांकि, पुलिस की ओर से इस मामले में कार्रवाई का कारण और घटना को लेकर आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
पीड़ित परिवार ने घटना में शामिल कुछ पुलिसकर्मियों पर शराब पीकर आने का भी आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पुलिसकर्मी किस आधार पर घर पहुंचे और कथित तौर पर बल प्रयोग क्यों किया गया।
इस घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली, नागरिकों के अधिकारों और कानून के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। अब इस मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होने का इंतजार है।