भीलवाड़ा: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा
पोक्सो कोर्ट-1 ने अभियोजन पक्ष के 11 गवाहों और 21 दस्तावेजों के आधार पर फैसला सुनाते हुए अभियुक्त पर 65 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
भीलवाड़ा जिले की पोक्सो कोर्ट संख्या-1 ने नाबालिग बालिका के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में आरोपी कन्हैया लाल उर्फ दुर्गेश कीर को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 65 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। विशिष्ट न्यायाधीश (पोक्सो कोर्ट-1) श्रीमती रेखा वधवा ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर यह फैसला सुनाया।
विशेष विशिष्ट लोक अभियोजक धर्मवीर सिंह कानावत के अनुसार, यह मामला 30 दिसंबर 2024 का है। पीड़िता के पिता ने 1 जनवरी 2025 को बीगोद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी 30 दिसंबर को ई-मित्र पर फॉर्म भरवाने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने अपने स्तर पर संभावित ठिकानों और रिश्तेदारों के यहां उसकी काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुसंधान शुरू किया। जांच के दौरान पुलिस ने गवाहों के बयान दर्ज किए और तकनीकी सहायता के साथ छानबीन की। इसके बाद पीड़िता को दस्तयाब कर लिया गया। अनुसंधान में आरोपी कन्हैया लाल उर्फ दुर्गेश कीर के खिलाफ अपहरण और दुष्कर्म का जुर्म प्रमाणित पाया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया।
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने मामले के समर्थन में 11 गवाहों के बयान और 21 दस्तावेज पेश किए। अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर विशिष्ट न्यायाधीश (पोक्सो कोर्ट-1) श्रीमती रेखा वधवा ने आरोपी कन्हैया लाल उर्फ दुर्गेश कीर को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास और 65 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म से जुड़े इस मामले में अदालत का फैसला सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि के साथ सामने आया।