तस्वीर में भीलवाड़ा निकाय चुनाव के दौरान नामांकन परिसर के बाहर एकत्रित भीड़ और हंगामा करते हुए लोग नजर आ रहे हैं।

भीलवाड़ा। राजस्थान निकाय चुनाव में नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन भीलवाड़ा में सिंबल जमा कराने को लेकर हाई-वोल्टेज राजनीतिक हंगामा सामने आया। शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवराम खटीक ने स्थानीय प्रशासन और सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए लोकतंत्र के हनन की बात कही है।

शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवराम खटीक के अनुसार, कांग्रेस के चुनाव प्रभारी और अन्य प्रमुख साथी निर्धारित समय पर दोपहर करीब 2:42 बजे नामांकन परिसर (कैंपस) में पहुंच गए थे। खटीक का कहना है कि उस समय एडीएम सिटी और पुलिस अधिकारी पुष्पा कासोटिया ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे समय पर परिसर में आ चुके हैं, इसलिए उनके सिंबल स्वीकार किए जाएंगे। अधिकारियों ने कांग्रेस प्रतिनिधियों से कहा कि कमरे में भीड़ नहीं करें और पास वाले कमरे में बैठकर सिंबल फॉर्म भर लें।

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, वे पास के कमरे में सिंबल फॉर्म भर रहे थे, तभी भाजपा विधायक अशोक कोठारी और अन्य भाजपा नेता वहां पहुंच गए। कांग्रेस प्रतिनिधियों का कहना है कि गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से वे दूसरे कक्ष में चले गए।

कांग्रेस के अनुसार, करीब 10-12 मिनट बाद, लगभग 3:10 बजे, जब प्रतिनिधि अपने शेष करीब 15-17 सिंबल जमा कराने पहुंचे तो अधिकारियों ने गेट बंद कर दिया और सिंबल लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इससे मौके पर विवाद की स्थिति बन गई।

इस दौरान सीटों को लेकर कांग्रेस के भीतर गुटबाजी या किसी तरह के आंतरिक विवाद की बात से शिवराम खटीक ने इनकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देरी आपसी चर्चा और फॉर्मों को री-चेक करने के कारण हुई थी। उनका कहना है कि पार्टी के स्तर पर सीटों को लेकर कोई आंतरिक विवाद नहीं था।

मामले के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने तत्काल जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिवराम खटीक ने कहा, "चुनावी नियमों के अनुसार जो भी प्रत्याशी या प्रतिनिधि समय सीमा के भीतर परिसर में आ जाता है, उसका फॉर्म जमा होना चाहिए। यह सरासर भाजपा की तानाशाही है।"

कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि इस प्रशासनिक रवैये के खिलाफ प्रदेश और शीर्ष नेतृत्व के निर्देशानुसार आगे की बड़ी रणनीति तय की जाएगी। नामांकन के अंतिम दिन सिंबल जमा कराने को लेकर सामने आया यह विवाद अब कांग्रेस की शिकायत और आगामी रणनीति के चलते राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।

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