रामभक्ति में अडिग आस्था से जीवन सफल, निर्धनों की सेवा ही सच्ची भगवान सेवा: आचार्य रामदयालजी
भीलवाड़ा के माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में आचार्य रामदयालजी महाराज ने रामभक्ति को जीवन का आधार बताया। चातुर्मास के दौरान 13 से 20 सितम्बर तक 108 श्रीमद् भागवतजी मूल पाठ का आयोजन होगा।
तस्वीर में भीलवाड़ा के माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में आयोजित सत्संग के दौरान प्रवचन देते हुए रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा, 30 अगस्त। अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने कहा कि जीवन में भक्ति करनी है तो केवल अपने राम की करें। हमारा काम सुधरे या बिगड़े, लेकिन राम के अलावा किसी अन्य की शरण में जाने की सोच भी नहीं रखनी चाहिए। राम के प्रति आस्था हर परिस्थिति में अडिग रहनी चाहिए। जिसकी आस्था राम-गुरू के प्रति हर स्थिति में बनी रहती है, वह जीवन के हर संकट से उबर सकता है, जबकि जिसकी आस्था डगमगाती है, उसकी जीवन नैया भी मझधार में फंस जाती है।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने ये विचार ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत रविवार को माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में आयोजित दैनिक चातुर्मासिक सत्संग में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राम किसी कथा का चरित्र मात्र नहीं, बल्कि हमारे परमात्मा हैं। उनकी भक्ति हमारी आत्मा को भवसागर से पार लगा सकती है। राम की भक्ति जिसने भी की, उसका जीवन सफल एवं सार्थक हो गया। जिसने राम से मुख मोड़ा, उससे दुनिया ने मुंह मोड़ लिया और जिस पर राम की कृपा हो गई, उसकी जिंदगी निहाल हो गई। इसलिए कैसी भी परिस्थिति बने, रामभक्ति में कमी नहीं आनी चाहिए।
आचार्यश्री ने कहा कि भगवान सबका विवाह कराते हैं, लेकिन यहां सब मिलकर भगवान का विवाह कराते हैं। एक तुलसी के साथ भगवान का कितनी बार विवाह कराना पड़ रहा है। भगवान के हजार विवाह कराने की बजाय आज जरूरत इस बात की है कि गरीब कन्याओं का विवाह हो, ताकि इतने लोगों का घर बस सके। भगवान का विवाह कराना तो एक भावना है, इसके निमित्त लक्ष्य यह होता है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की कन्याओं की शादी आसानी से हो सके।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि भक्ति के साथ समाज में ऐसे कार्यों को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिससे निर्धन और जरूरतमंद का भला हो। निर्धन की सेवा भी भगवान की सेवा का ही रूप है। जो कमजोर और असहाय की सेवा के लिए तत्पर रहता है, उस पर परमात्मा की कृपा सदा बनी रहती है।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती तथा रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
108 श्रीमद् भागवतजी मूल पाठ का आयोजन 13 से 20 सितम्बर तक
स्वामी रामचरणजी महाराज की पावन भूमि पर उनकी कृपा से विश्व शांति चातुर्मास समिति द्वारा विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से चातुर्मास के दौरान भीलवाड़ा में 13 से 20 सितम्बर तक आचार्य रामदयालजी महाराज के सानिध्य में 108 श्रीमद् भागवतजी मूल पाठ का भव्य एवं दिव्य आयोजन होगा। मूल पाठ करने के लिए 108 यजमान चुने जाएंगे।
इस अवधि में प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक संत श्री मनोरथरामजी राम मचलाना द्वारा श्रीमद् भागवत ज्ञान प्रवचन होंगे। इसी तरह सुबह 10.30 से 11.30 बजे एवं शाम 4 से 5 बजे तक आचार्य रामदयाल महाराज के मुखारबिंद से पूज्य वाणीजी के भक्ति प्रवचन होंगे।
जीवन को पावन करने वाले इस आयोजन के दौरान भक्ति, भक्त और भगवान की त्रिवेणी गंगा प्रवाहित होगी। आचार्य रामदयाल महाराज ने अधिकाधिक श्रद्धालुओं से भक्ति की इस त्रिवेणी में सहभागी बनने की अपील की है।