महिला सशक्तिकरण पर वैचारिक वार्ता में उठे सवाल, स्वतंत्रता के साथ पारिवारिक संतुलन पर जोर
भीलवाड़ा में महिला सशक्तिकरण और महिला स्वतंत्रता के दुष्परिणाम विषय पर वैचारिक वार्ता हुई। शिक्षा और आत्मनिर्भरता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व, पारिवारिक संवेदनशीलता और संतुलन पर जोर दिया गया।
तस्वीर में भीलवाड़ा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गीता भवन सभागार में बैठे अंतरराष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब के पदाधिकारी नजर आ रहे हैं, जिनके आगे 'चर्चा.... चाय पर IMCC INDIA' का बैनर रखा हुआ है।
भीलवाड़ा में अन्तर्राष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब की ओर से राष्ट्रीय कार्यालय गीता भवन सभागार में रविवार को ‘महिला सशक्तिकरण और महिला स्वतंत्रता के दुष्परिणाम’ विषय पर वैचारिक वार्ता आयोजित की गई। वार्ता में महिला शिक्षा, आत्मनिर्भरता और समान अवसरों को आवश्यक बताते हुए बदलते सामाजिक और पारिवारिक परिवेश पर निष्पक्षता से विचार करने की आवश्यकता जताई गई।
वैचारिक वार्ता में कहा गया कि पिछले चार दशकों से महिला सशक्तिकरण और महिला स्वतंत्रता की बातें जोर-शोर से की गईं, लेकिन उनके दुष्परिणाम और दुष्प्रभाव अब सभी को नजर आने लगे हैं। इनमें कैरियर को प्राथमिकता, विवाह की बढ़ती आयु, जीवनसाथी के चयन में कठोर मापदण्ड, सामाजिक सम्पर्कों का अभाव, बदलती जीवनशैली से खराब स्वास्थ्य तथा अंतर्जातीय और अन्य धर्मों में विवाहों की बढ़ती संख्या जैसे विषय सामने आए।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता और समान अवसर प्रत्येक लड़की का अधिकार हैं और इसमें किसी प्रकार की दो राय नहीं है। हालांकि, इस परिवर्तन के सामाजिक और पारिवारिक परिणामों पर भी निष्पक्षता से विचार करना जरूरी है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद महिलाओं पर बाहरी कार्यक्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और कार्य का दबाव अत्यधिक है। वहीं, घर-परिवार की अधिकांश जिम्मेदारियां आज भी बड़ी सीमा तक महिलाओं पर ही हैं। इसके परिणामस्वरूप महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारी का दबाव है और सामाजिक तथा पारिवारिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।
कार्यक्रम में वैचारिक वार्ता की विशिष्ट अतिथि क्लब की महाराष्ट्र भिवंडी नगर अध्यक्ष श्रीमती नीतू श्री सुनील दरगड़, मुख्य अतिथि क्लब की राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती डाॅ सुमन श्री सुरेश सोनी तथा अध्यक्षता क्लब की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती अनिता डॉ अशोक सोडाणी ने की।
वैचारिक वार्ता की विशिष्ट अतिथि श्रीमती नीतू श्री सुनील दरगड़ ने कहा कि प्रत्येक निर्णय के अच्छे और बुरे प्रभाव होते हैं। इनके परिणाम केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहते, बल्कि परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि आज विवाह व्यवस्था, पारिवारिक व्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
मुख्य अतिथि क्लब की राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती डाॅ सुमन श्री सुरेश सोनी ने कहा कि एक सशक्त समाज वही है, जहां शिक्षा भी हो, स्वतंत्रता भी हो, संस्कार भी हों और परिवार व समाज की गरिमा भी बनी रहे।
वैचारिक वार्ता की अध्यक्षता करते हुए क्लब की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती अनिता डॉ अशोक सोडाणी ने कहा कि आवश्यकता किसी पर दोषारोपण करने की नहीं, बल्कि समाधान खोजने की है। इस संतुलन को बनाए रखने में हम जैसे सभी सामाजिक संगठनों का उत्तरदायित्व है कि हम छोटी-छोटी वैचारिक वार्ताएं समाज की तीनों पीढ़ियों के साथ करते रहें और उनमें संवाद सेतु का कार्य करें।
उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व और पारिवारिक संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक है। यह आज के दौर में माहेश्वरी समाज के उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता भी है।