महात्मा गांधी जीवन दर्शन संस्थान ने अगस्त क्रांति स्मृति दिवस पर शहीदों को किया नमन
भीलवाड़ा में अगस्त क्रांति स्मृति दिवस पर गांधी सर्किल में महात्मा गांधी को माल्यार्पण कर भारत छोड़ो आंदोलन के नायकों को नमन किया गया।
भीलवाड़ा के गांधी सर्किल पर 9 अगस्त को आयोजित कार्यक्रम में महात्मा गांधी जीवन दर्शन संस्थान के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपिता को माल्यार्पण कर क्रांति वीरों को याद किया।
भीलवाड़ा, 09 अगस्त। अगस्त क्रांति स्मृति दिवस पर महात्मा गांधी जीवन दर्शन संस्थान जिला-भीलवाड़ा की ओर से गांधी बाजार स्थित गांधी सर्किल पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को माल्यार्पण कर अगस्त क्रांति के महान नायकों के बलिदान को याद किया गया।
अक्षय त्रिपाठी, जिला संयोजक महात्मा गांधी जीवन दर्शन संस्थान जिला-भीलवाड़ा के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में गांधी बाजार में भोपाल क्लब के सामने स्थित गांधी सर्किल पर गांधी जी को माल्यार्पण किया गया। युवा संयोजक एडवोकेट अशोक जैन ने बताया कि 9 अगस्त 1942 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में देश की स्वाधीनता के लिए “भारत छोड़ो आंदोलन” का ऐतिहासिक बिगुल बजा था, जिसने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी और भारत की आज़ादी के संघर्ष को निर्णायक दिशा प्रदान की।
जिला सह संयोजक मुस्ताक अली मंसूरी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि अगस्त क्रांति का आंदोलन केवल एक आंदोलन नहीं था, बल्कि करोड़ों भारतीयों के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और मातृभूमि के प्रति समर्पण की विराट अभिव्यक्ति था। “करो या मरो” के मंत्र से गूंजती उस क्रांति ने देशवासियों के हृदय में स्वतंत्रता की ऐसी ज्वाला प्रज्वलित की, जिसकी लौ को अंग्रेजों के दमन और अत्याचार भी बुझा नहीं सके।
पूर्व सभापति मंजू पोखरना ने अपने उदबोधन में अगस्त क्रांति के गौरवशाली स्मरण दिवस पर सभी ज्ञात-अज्ञात वीर सेनानियों एवं अमर बलिदानियों को कोटि-कोटि नमन किया। उन्होंने कहा कि इन वीर सेनानियों ने अपने त्याग, तपस्या, संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान से देश को स्वतंत्र भारत की अमूल्य विरासत सौंपी। उन्होंने इसी प्रेरणा से आज फिर लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी से एकसाथ जुटने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में कलीम काजी, रफीक शेख, ममता शर्मा, सुरेश बंब, अली मंसूरी, दीपमाला लोट, मुन्ना राम मीणा, खेमराज पनवा सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अगस्त क्रांति स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में स्वतंत्रता आंदोलन के महान नायकों और उनके बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।