भीलवाड़ा में श्रम कानूनों, निजीकरण और बढ़ती महंगाई के विरोध में कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि।

भीलवाड़ा में मजदूरों एवं श्रमिक वर्ग की मांगों को लेकर सोमवार, 10 अगस्त 2026 को देश की सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर भारतीय ट्रेड यूनियन सीटू सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों ने रैली निकालकर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। श्रमिकों ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण, ठेका प्रथा, श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव और दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हुए जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम मांग पत्र सौंपा।

इंटर यूनियन के जिला अध्यक्ष दीपक व्यास, महामंत्री कान सिंह, कार्यालय सचिव सत्यनारायण सेन, जलदाय यूनियन से कन्हैया लाल शर्मा, भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र सीटू के प्रदेश सचिव ओमप्रकाश देवाणी, टेक्सटाइल यूनियन के सोनू शर्मा, सद्दाम, राजू लाल यादव, जय सिंह, प्रदीप पांडे, हिम्मत सिंह बंजारा, श्यामलाल सालवी, भूपेंद्र सिंह, किशन लाल सालवी, जीतू, सम्पत, करण सिंह, नारायण लाल माली सहित कई श्रमिक मुखर्जी पार्क में एकत्रित हुए। यहां से रैली निकालकर श्रमिक जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन में जनता जल योजना से भेरूलाल खारोल, नानूराम, बाबूलाल, ओम प्रकाश गर्ग, लक्ष्मेन्द्रर मलिक, भेरूलाल तेली, भागीरथ, शीशराम, बबलू सिंह, वशिष्ठ, राजवीका कर्मचारी यूनियन से जिला अध्यक्ष अनीता कंवर, नंद कंवर, बरजी देवी, सरिता देवी, टीना कंवर, सलमा बानो, पिकी सेन, जिला बिल्डिंग वर्कर्स यूनियन से रतनलाल नट, जोरा बानो, मोतीलाल, रिप्रेजेंटेटिव कुलदीप सिंह, कपिल वर्मा, रामेश्वर लाल जाट आदि कई श्रमिक शामिल रहे।

श्रमिक संगठनों ने कहा कि आज देश का श्रमिक वर्ग बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण, ठेका प्रथा, श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव तथा दमनकारी नीतियों से गंभीर संकट का सामना कर रहा है। मजदूरों की मेहनत से देश की अर्थव्यवस्था चलती है, लेकिन उन्हें सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल तक उपलब्ध नहीं हैं।

ज्ञापन में गिरफ्तार किए गए सभी श्रमिकों और कार्यकर्ताओं की तत्काल एवं बिना शर्त रिहाई करने तथा सभी झूठे मुकदमे वापस लेने, श्रमिक विरोधी श्रम संहिताओं को वापस लेने और ट्रेड यूनियनों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता कर भारतीय श्रम सम्मेलन आयोजित करने की मांग की गई। इसके साथ ही न्यूनतम वेतन कम से कम 26,000 रुपये प्रतिमाह सुनिश्चित करने, 8 घंटे का कार्यदिवस लागू करने तथा अतिरिक्त कार्य के लिए दोगुना ओवरटाइम भुगतान सुनिश्चित करने की मांग रखी गई।

श्रमिकों ने सभी श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल एवं वैधानिक श्रम अधिकार लागू करने, संविदा एवं ठेका श्रमिकों को समान काम के लिए समान वेतन और सभी सुविधाएं देने तथा नियमितीकरण करने की मांग भी की। सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण और श्रमिक विरोधी नीतियों पर रोक लगाने, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण करने तथा सस्ती एलपीजी उपलब्ध कराने की मांग ज्ञापन में शामिल रही।

इसके अलावा सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, ईएसआई और पीएफ की गारंटी देने तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करते हुए श्रमिक आंदोलनों पर दमन बंद करने की मांग की गई। ज्ञापन में महामहिम से देश के करोड़ों मेहनतकश मजदूरों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उपरोक्त मांगों पर तत्काल सकारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया। सभी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम मांग पत्र दिया गया।

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