भगवान को प्रसन्न करना है तो भक्तिमय बना लें अपना जीवन: आचार्य रामदयालजी महाराज
माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में चातुर्मासिक सत्संग में आचार्य रामदयालजी महाराज ने भक्ति, भजन और गुरु कृपा का महत्व बताया।
भीलवाड़ा के माणिक्यनगर रामद्वारा में आयोजित विश्व शांति कल्याण चातुर्मास के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज।
भीलवाड़ा, 10 अगस्त। भगवान को प्रसन्न करने का एकमात्र माध्यम भक्ति है। सत्संग और भजन का अवसर जिस घड़ी मिले, वही सर्वश्रेष्ठ होती है। भजन के लिए कोई समय प्रतिकूल नहीं होता, जब भी भजन करेंगे, समय आपके अनुकूल हो जाएगा। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने सोमवार को माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत आयोजित दैनिक सत्संग में व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि प्रशस्ति गान किसी का भी हो सकता है, लेकिन भजन केवल भगवान के लिए होते हैं। भक्ति के बिना भगवान का साक्षात्कार नहीं हो सकता। भजन एवं वाणी पाठ करने के पीछे हमारा कोई लक्ष्य होगा तो बार-बार भजन और पाठ करने का मन होगा। परमात्मा तक पहुंचने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम भजन है। भजन करने से परमात्मा के सामीप्य की अनुभूति होती है।
उन्होंने कहा कि राम की भक्ति जीवन का बेड़ा पार लगाती है। राम के बारे में कहने और सुनने से भी उद्धार होता है। भजन वह होता है जिसमें रस आए। भजन से प्राप्त होने वाला आत्मीय आनंद उसे करने वाला ही महसूस कर सकता है। आचार्यश्री ने कहा कि हमारे भजन शास्त्र की गहराई को छूने वाले होते हैं। भावों से की जाने वाली भक्ति ही भजन होते हैं। शास्त्र के सत्य को सत्य कहने का दम नहीं है तो असत्य कहने की धृष्टता भी नहीं करनी चाहिए।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि मति, चातुर्य व दक्षता वाले सद्गुरू की कृपा मिल जाए तो अज्ञान, मतिहीन व कुंठित भी गुरु के चरणों में आकर ज्ञानी और कुशाग्र बन सकता है। भक्ति के प्रभाव से अशांत चित्त शांत हो जाता है और मंदबुद्धि प्राणी बुद्धिमान बन जाता है।
उन्होंने कहा कि हम परमात्मा के प्रति अपनी श्रद्धा, आस्था एवं भक्ति अडिग रखेंगे तो भगवान की कृपा हम पर सदा बनी रहेगी। भगवान हर हाल में अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और जो भगवान के चरणों में समर्पित हो जाता है, उसके जीवन के सारे कष्ट वह दूर कर देता है।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस पर प्रवचन दिया। श्रद्धालुओं ने भी भजन की प्रस्तुति दी। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
चातुर्मास में दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस जी ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।