तस्वीर में बाएं से श्रीमती धापू देवी और उनके पति रामेश्वर लाल नजर आ रहे हैं, जिन्हें भीलवाड़ा के हमीरगढ़ क्षेत्र से जुड़े मामले में अदालत ने दोषमुक्त किया है।   

भीलवाड़ा, 28 सितंबर। हमीरगढ़ थाना क्षेत्र से जुड़े करीब 9 साल पुराने फौजदारी मामले में स्थानीय न्यायालय ने अभियुक्त रामेश्वर लाल दरोगा और उनकी पत्नी श्रीमती धापू देवी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए संतोषजनक साक्ष्य और स्वतंत्र गवाह पेश नहीं कर सका।

अभियुक्तगण की ओर से अधिवक्ता मुकेश सुवालका ने पैरवी की। अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या 01, भीलवाड़ा ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए दोनों अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 341, 323 और 325/34 के आरोपों से बरी कर दिया।

मामला संपत्ति विवाद और पुरानी रंजिश से जुड़ा था। प्रार्थी रतनदास ने पुलिस थाना हमीरगढ़ में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उसके पिता द्वारा खरीदे गए एक पुराने नोहरे (बाड़े) को लेकर विवाद चल रहा था। प्रार्थी का आरोप था कि जब वह उक्त नोहरे का सौदा बालू जाट नामक व्यक्ति को करके कब्जा सुपुर्द करने गया, तब आरोपी रामेश्वर लाल दरोगा और उनकी पत्नी धापू देवी वहां पहुंचे। दोनों ने जमीन नहीं बेचने की बात कहते हुए उसके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की। प्रार्थी पक्ष ने यह भी आरोप लगाया था कि मारपीट के दौरान उसके हाथ में फ्रैक्चर हो गया।

विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 6 गवाहों को परीक्षित कराया गया। मामले में विभिन्न दस्तावेज और मेडिकल रिपोर्ट भी पेश की गईं। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता मुकेश सुवालका ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष घटना को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।

न्यायालय के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि घटना स्थल के आसपास घनी आबादी होने के बावजूद पुलिस द्वारा तैयार किए गए नक्शा मौका में किसी स्वतंत्र गवाह या पड़ोसी के हस्ताक्षर नहीं कराए गए थे। इसके अलावा, पुलिस द्वारा मारपीट में प्रयुक्त कथित लकड़ी को भी बरामद नहीं किया गया। इससे अभियोजन पक्ष की घटना संबंधी कहानी पर संदेह उत्पन्न हुआ।

मामले में चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवनारायण यादव की गवाही भी महत्वपूर्ण रही। उन्होंने गवाही के दौरान स्वीकार किया कि एक्स-रे रिपोर्ट में हड्डी के फ्रैक्चर के बीच कोई स्पष्ट गैप नजर नहीं आ रहा था। उन्होंने यह भी बताया कि चोटें कठोर धरातल पर गिरने से भी आ सकती हैं। प्रार्थी के शरीर पर केवल दो चोटें पाई गई थीं।

पत्रावली से यह भी सामने आया कि दोनों पक्षों के बीच पूर्व में भी मामले दर्ज हुए थे और विवाद पुरानी रंजिश से जुड़ा हुआ था। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण किया।

साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष अभियुक्तों के विरुद्ध लगाए गए अपराध को संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा है। इसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने रामेश्वर लाल दरोगा और श्रीमती धापू देवी, निवासी जवासिया, थाना हमीरगढ़, जिला भीलवाड़ा, को धारा 341, 323 और 325/34 भा.द.सं. के आरोपों से संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।

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