आचार्य पुलकसागर महाराज का संदेश: पुरानी बातें भूलकर आगे बढ़ें, रिश्तों में शर्तें खत्म करती हैं प्यार
भीलवाड़ा के सूर्यमहल में आचार्य पुलकसागर महाराज ने जीवन जीने की कला पर प्रवचन देते हुए रिश्तों में शर्तों, अपेक्षाओं और क्रोध से बढ़ती दूरियों पर विचार रखे। उन्होंने पुरानी कड़वी बातें भूलकर प्रेम और आनंद के साथ जीवन जीने का संदेश दिया।
भीलवाड़ा के शास्त्रीनगर में आयोजित चातुर्मास कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं को सुखी जीवन और रिश्तों में मिजाज बनाए रखने का संदेश देते आचार्य पुलकसागर महाराज।
भीलवाड़ा में आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जीवन को सुखी बनाना है तो बीती बातों को भूलकर आगे बढ़ना सीखना होगा। रिश्तों में शर्तें और अपेक्षाएं बढ़ने से प्रेम समाप्त होने लगता है और आपसी संबंधों में बहसबाजी व दूरियां बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी कड़वी बातों को दिल से निकालकर वर्तमान के पलों को आनंद के साथ जीना ही सुखी जीवन का मार्ग है।
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से आयोजित चातुर्मास के दौरान रविवार, 25 अक्टूबर को शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज की मंगल दिव्य देशना जारी रही। भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे आचार्यश्री ने अंतिम चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला ‘जीवन जीने की कला’ के पांचवें दिन श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जिन रिश्तों में शर्तें आ जाती हैं, वहां प्यार समाप्त होने लगता है। ऐसे संबंधों में मिलन के बजाय बहसबाजी होती है और समझाने वाले भी हार जाते हैं। शर्तों से बंधे रिश्ते तलाक की ओर ले जाते हैं और तलाक होने पर सुख-चैन समाप्त हो जाता है। शर्तें और अपेक्षाएं सुलह का रास्ता रोककर कलह को बढ़ाती हैं। इसके विपरीत, जो हो गया उसे जाने देने की सोच ही सुलह का मार्ग खोलती है।
उन्होंने कहा कि संचित कर्मों को नष्ट करने पर ही कषायों से मुक्ति मिलेगी और प्रेम भाव जागृत होगा। जिस तरह पुराने कैलेंडर को फेंक दिया जाता है, उसी तरह पुरानी बातों को भी दिल से निकाल देना चाहिए। पुरानी बातों को भुलाकर जीना सीख लेने से जीवन सुखी हो सकता है।
आचार्यश्री ने कहा कि जो पल हमें मिल रहे हैं, उन्हें आनंद के साथ जीना ही धर्म है। ये पल और यह शरीर दोबारा प्राप्त नहीं होने वाले हैं। माता-पिता की टोकाटोकी के कारण उन्हें कभी दुश्मन नहीं समझना चाहिए, क्योंकि वे दोबारा नहीं मिलेंगे। उनके जाने के बाद कोई यह पूछने वाला नहीं होगा कि तुम अब तक कहां थे। उन्होंने कहा कि पुरानी कड़वी बातों को याद रखकर जिंदगी को नरक नहीं बनाना चाहिए। कषायों से मुक्ति पाए बिना मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती। इसलिए कषायों को मिटाकर मन को निर्मल और पावन बनाना चाहिए। क्रोध और कषायों के कारण आपसी दूरियां बढ़ती हैं।
जीवन में व्यवहार और मिजाज बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि यदि व्यक्ति अपने व्यवहार और मिजाज को बनाए रखना सीख ले, तो जिंदगी सुखमय बनी रह सकती है। परिस्थितियां वही रहती हैं, लेकिन व्यक्ति का बर्ताव बदलने से जिंदगी प्रेम से नफरत की ओर बढ़ने लगती है। निकटता और दूरियां हमारे रवैये के कारण पैदा होती हैं। व्यक्ति वही रहता है, लेकिन उसका मिजाज बदलने से अपनों के बीच दूरियां बढ़ने लगती हैं। इसलिए अपने व्यवहार को पहले जैसा बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य में पहली बार मिलने वाला आनंद बाद में कम होता जाता है। समय के साथ एक्शन बदलने पर रिएक्शन भी बदल जाता है। जिंदगी सुखी बनानी है तो हर मुलाकात को पहली मुलाकात और हर रात को आखिरी रात समझकर जीना चाहिए। व्यक्ति अपने मिजाज को बनाए रखे, तो जिंदगी से प्यार कभी समाप्त नहीं होगा।
धर्मसभा के दौरान जहाजपुर से आए श्रेष्ठीजनों ने आचार्य पुलकसागर महाराज से चातुर्मास समाप्त होने के बाद स्वस्तिधाम जहाजपुर पधारने की विनती की। इस पर आचार्यश्री ने कहा कि उनकी टोंक के मार्ग से श्रीमहावीरजी होते हुए आगरा की तरफ जाने की भावना है। अनुकूलता रही तो स्वस्तिधाम पहुंचकर मुनिसुव्रतनाथ भगवान के दर्शन करने की भी भावना है।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि प्रवचन के प्रारंभ में पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट का सौभाग्य राजेन्द्र, रोहित और सम्यक बाकलीवाल परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।
चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह और सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि 30 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 8.45 से 10 बजे तक आचार्यश्री के मुखारबिंद से दिव्य देशना होगी। इसके साथ ही प्रतिदिन शाम 6.30 से 7.30 बजे तक आनंद यात्रा (प्रश्न मंच) का आयोजन किया जा रहा है। इसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।