भुसावर के पथैना में श्रीमद् भागवत कथा: रुद्र गिरी महाराज ने बताया भक्ति का सार
पथैना के बिहारी जी मंदिर में श्रीमद् भागवत सप्ताह के दौरान रुद्र गिरी महाराज ने भक्ति, मोक्ष और भागवत महापुराण का सार बताया।
बिहारी जी मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत कथा सुनते हुए बड़ी संख्या में श्रद्धालु।
भुसावर उपखंड के गांव पथैना स्थित बिहारी जी मंदिर परिसर में रविवार को आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह में कथा वाचक रुद्र गिरी महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा के महत्त्व और जीवन में भक्ति के उद्देश्य पर प्रवचन किया। उन्होंने कहा कि संसार में रहते हुए भगवान के प्रति अनन्य भक्ति और परमपिता परमात्मा की प्राप्ति ही मनुष्य जीवन का परम धर्म और उद्देश्य है।
रुद्र गिरी महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत वेदों, उपनिषदों और ब्रह्मसूत्रों का रस-निचोड़ या सार है। श्रीमद् भागवत सप्ताह मनुष्य को भक्ति की ओर प्रेरित करता है। यह कथा संसार से भागना नहीं सिखाती, बल्कि परिवार और कर्तव्यों के बीच रहते हुए मन को भगवान से जोड़ना सिखाती है।
उन्होंने कहा कि परमात्मा ही सत्य हैं। श्री कृष्ण ही परम सत्य और सभी ऊर्जाओं के स्रोत हैं। जीव उन्हीं का अंश है, लेकिन माया के प्रभाव के कारण स्वयं को भूल जाता है। भागवत कथा सुनने से मन निर्मल होता है, विवेक जागता है और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कथा वाचक ने कहा कि जीवन का सदुपयोग अच्छे कर्मों से किया जाना चाहिए। मानव शरीर बहुत भाग्य से मिलता है, इसलिए इसका उद्देश्य केवल सांसारिक मोह-माया में भटकना नहीं, बल्कि भगवत्स्मरण करना है।
उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत महापुराण शुकदेव जी और राजा परीक्षित के बीच हुआ वह संवाद है, जो जीवन के अंतिम क्षणों में भी भयमुक्त होकर परमात्मा में लीन होने का संदेश देता है। प्रवचन के दौरान उन्होंने कृष्ण जन्म, गोवर्धन लीला, ध्रुव-प्रह्लाद चरित्र और उखल संवाद भी सुनाया।
श्रीमद् भागवत महापुराण के महत्त्व एवं महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “यह श्रीमद्भागवत ब्रह्मसूत्रों एवं सब उपनिषदों का सार है।” उन्होंने कहा कि भागवत किसी ने बनाया नहीं। भगवान ने अपनी शक्ति से ब्रह्मा के हृदय में इसे प्रकट किया। आगे ब्रह्मा ने भागवत पुराण को प्रकट किया।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवतम् सर्व वेदान्त का सार है। उस रसामृत के पान से जो तृप्त हो गया है, उसे किसी अन्य जगह पर कोई रति नहीं हो सकती। कथा के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को भक्ति, भगवत्स्मरण और अच्छे कर्मों के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।