मुँह के छोटे संकेत बन सकते हैं गंभीर बीमारी की वजह, डॉ. प्रांजल सिंह मदेरणा ने दी चेतावनी
दंत चिकित्सक डॉ. प्रांजल सिंह मदेरणा ने मसूड़ों से खून आने, जबड़े की आवाज और सफेद-लाल निशानों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है।
डॉक्टर मरीज के मुँह की जाँच करती हुई दिखाई दे रही हैं।
भरतपुर, 31 अक्टूबर। मुँह में बार-बार छाले होना, मसूड़ों से खून आना, दाँतों में झनझनाहट, जबड़े से कट-कट की आवाज आना या मुँह के अंदर सफेद और लाल निशान दिखाई देना जैसी समस्याओं को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। ये लक्षण कई बार शरीर की सेहत से जुड़ी गंभीर परेशानियों के संकेत हो सकते हैं। दंत चिकित्सक डॉ. प्रांजल सिंह मदेरणा ने ओरल हेल्थ से जुड़े ऐसे लक्षणों के प्रति सतर्क रहने और समय पर जाँच कराने की सलाह दी है।
रोजमर्रा की जिंदगी में लोग अक्सर दाँतों और मसूड़ों से जुड़ी छोटी-छोटी परेशानियों को गंभीरता से नहीं लेते। किसी को ठंडा पानी पीते ही दाँतों में झनझनाहट महसूस होती है, तो किसी के मसूड़ों से ब्रश करते समय खून आने लगता है। वहीं, कई लोग मुँह में बार-बार होने वाले छालों और दाँतों में असामान्य बदलाव को भी अनदेखा कर देते हैं। डॉ. प्रांजल सिंह मदेरणा के अनुसार, ओरल हेल्थ से जुड़े ये लक्षण शरीर की सेहत के महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। समय पर इनकी पहचान और जाँच कराने से कई समस्याओं को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
मुँह में बार-बार छाले होना आम समस्या है। कई बार ये छाले कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन यदि बार-बार छाले हो रहे हों, लंबे समय तक बने रहें या खाने-पीने और बोलने में परेशानी पैदा करें तो इन्हें सामान्य मानकर छोड़ना उचित नहीं है। तनाव, मुँह में चोट, कुछ खाद्य पदार्थों के प्रति संवेदनशीलता, पोषण की कमी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारणों से छाले हो सकते हैं। हर बार छाले होने की वजह एक जैसी नहीं होती, इसलिए बार-बार होने वाली इस समस्या का सही कारण जानना जरूरी है। डॉ. प्रांजल सिंह मदेरणा का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल दर्द कम करने वाली दवाओं या घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय छालों की वजह की जाँच करानी चाहिए। विशेष रूप से यदि कोई घाव दो सप्ताह में ठीक नहीं होता है तो दंत चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।
सोशल मीडिया पर दाँतों को सफेद और चमकदार बनाने के लिए बताए जाने वाले घरेलू नुस्खे भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। इंटरनेट पर कई लोग नींबू और बेकिंग सोडा लगाने, चारकोल या अन्य चीजों का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। शुरुआत में ये उपाय आसान और सस्ते लग सकते हैं, लेकिन बिना सही जानकारी के इनका इस्तेमाल दाँतों को नुकसान पहुँचा सकता है। नींबू जैसे अम्लीय पदार्थ दाँतों की ऊपरी सुरक्षात्मक परत यानी इनेमल को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, बेकिंग सोडा और अन्य खुरदरे पदार्थों का गलत तरीके से इस्तेमाल दाँतों की सतह और मसूड़ों को नुकसान पहुँचा सकता है। इनेमल एक बार काफी घिस जाने के बाद प्राकृतिक रूप से दोबारा नहीं बनता। डॉ. प्रांजल सिंह मदेरणा ने सलाह दी है कि इंटरनेट पर बताए जाने वाले हर नुस्खे को सही नहीं मानना चाहिए। दाँतों का रंग बदलने या पीलापन दूर करने से पहले उसकी वजह समझना और सुरक्षित उपचार के लिए दंत चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।
इसी तरह, खाना चबाते समय, जम्हाई लेते समय या मुँह खोलने-बंद करने पर जबड़े के पास कट-कट या क्लिक जैसी आवाज आना भी ध्यान देने योग्य लक्षण है। कई लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। यह आवाज जबड़े के जोड़ से संबंधित हो सकती है, जिसे टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट (TMJ) कहा जाता है। कुछ मामलों में केवल आवाज आती है और दर्द नहीं होता, लेकिन यदि इसके साथ जबड़े में दर्द, मुँह खोलने में कठिनाई, जबड़ा अटकने या सिर के आसपास दर्द की समस्या भी हो तो जाँच कराना जरूरी है। दाँत पीसने की आदत, जबड़े पर अधिक दबाव, चोट और जोड़ से जुड़ी समस्याएँ इसके संभावित कारण हो सकते हैं। डॉ. प्रांजल सिंह मदेरणा के अनुसार, लगातार परेशानी होने पर इसे केवल आदत समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। बिना जाँच के जबड़े पर दबाव डालने वाले व्यायाम या उपचार करना भी उचित नहीं है।
मुँह के अंदर गाल, जीभ, मसूड़ों या होंठों पर सफेद अथवा लाल निशान दिखाई देना भी गंभीरता से लेने की जरूरत है। कई लोग इन्हें मामूली छाला या जलन समझकर छोड़ देते हैं। हालांकि, कई बार ऐसे निशान सामान्य कारणों से भी हो सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये गंभीर बीमारी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। विशेष रूप से ऐसा सफेद या लाल निशान जो ठीक नहीं हो रहा हो, बार-बार उसी जगह दिखाई देता हो, आकार में बढ़ रहा हो या जिसके साथ दर्द, खून आना अथवा निगलने में परेशानी हो, उसकी जाँच कराना जरूरी है। हर सफेद या लाल दाग कैंसर नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक बने रहने वाले ऐसे बदलावों को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। यदि कोई घाव या निशान दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक बना रहता है तो दंत चिकित्सक अथवा संबंधित विशेषज्ञ से जाँच करानी चाहिए। तंबाकू और गुटखा जैसे उत्पादों का सेवन करने वालों को इस मामले में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
डॉ. प्रांजल सिंह मदेरणा के अनुसार, ओरल हेल्थ का मतलब केवल दाँतों को साफ और चमकदार बनाए रखना नहीं है। मुँह में होने वाले बदलाव, जबड़े से जुड़ी परेशानियाँ, बार-बार छाले होना और लगातार मुँह सूखना भी स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। बेहतर ओरल हेल्थ के लिए नियमित रूप से ब्रश करना, तंबाकू और गुटखे से दूर रहना, संतुलित खानपान अपनाना, मीठे खाद्य पदार्थों का सीमित सेवन करना, रोजाना दाँतों के बीच की सफाई करना और समय-समय पर दंत जाँच कराना जरूरी है। मुँह में दिखाई देने वाले छोटे बदलावों की समय पर पहचान और उचित जाँच से गंभीर समस्याओं का पता लगाने में मदद मिल सकती है।