भरतपुर के भुसावर में अहोई अष्टमी पर महिलाएं संतान की दीर्घायु के लिए अहोई माता की पूजा करेंगी। Image generated by AI for illustrative purposes.   

भरतपुर जिले के ऐतिहासिक शहरों में शामिल भुसावर सहित उपखंड मुख्यालय क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में 1 नवंबर 2026, रविवार को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा। महिलाएं संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और जीवन में आने वाली अनहोनी को टालने की कामना के साथ अहोई माता की पूजा-अर्चना करेंगी। इस दौरान मां पार्वती (गौरी) के अहोई स्वरूप की विधि-विधान से पूजा की जाएगी।

अहोई अष्टमी के अवसर पर महिलाएं चांदी की अहोई बनाकर श्रद्धा के साथ पूजा करेंगी। इसके साथ ही कपड़े पर गोबर से आठ कोष्ठक बनाकर बच्चों की आकृतियां तैयार की जाएंगी और अहोई अष्टमी की कथा सुनी जाएगी। महिलाएं रात में तारों की छांव में चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करेंगी। इसके बाद सास और परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर अन्न-जल ग्रहण करेंगी।

इस दिन महिलाएं अहोई माता से अपनी संतान के जीवन में किसी भी प्रकार की अनहोनी को टालने और उसकी दीर्घायु की कामना करते हुए अर्जी लगाएंगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार अहोई माता की पूजा संतान के सुख, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना के लिए की जाती है।

आचार्य एवं पंडित पुष्पेंद्र मिश्र जी और राघवेन्द्र शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 01 नवंबर 2026 को रविवार दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन अगले दिन यानी 02 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होगा।

उन्होंने बताया कि अहोई अष्टमी की पूजा-अर्चना शाम के समय की जाती है। इसी दौरान तारों की छांव में चंद्र देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। ऐसे में वर्ष 2026 में अहोई अष्टमी का व्रत 01 नवंबर, रविवार को रखा जाएगा।

मान्यता है कि निसंतान महिलाओं द्वारा अहोई अष्टमी का व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही अहोई माता के आशीर्वाद से उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। भुसावर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं संतान की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए श्रद्धापूर्वक यह व्रत रखेंगी।

Tags: