भुसावर में अवैध खनन पर सवाल: दिन-रात ब्लास्टिंग से दहशत, उजड़ती पहाड़ियां और प्रशासन पर ग्रामीणों के गंभीर आरोप

भुसावर क्षेत्र में अवैध खनन, दिन-रात ब्लास्टिंग, घरों में दरारें और उड़ती धूल से ग्रामीण परेशान हैं। प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

Update: 2026-07-25 12:45 GMT

तस्वीर में पहाड़ी क्षेत्र में खनन गतिविधियां और पत्थरों की खुदाई का दृश्य दिखाई दे रहा है।

भुसावर क्षेत्र में अवैध खनन के चलते अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियां लगातार उजड़ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पहाड़ों की खुदाई के लिए किए जा रहे विस्फोटों से न केवल वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि मानव जीवन भी खतरे में पड़ गया है। उनका कहना है कि पहाड़ों पर हो रही ब्लास्टिंग से घरों में दरारें पड़ गई हैं, क्रेशरों से उड़ने वाली धूल जानलेवा बनती जा रही है और आए दिन हादसे हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खनिज, वन, राजस्व, पुलिस और प्रदूषण विभाग इन शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे, जिससे खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

ग्रामीणों के अनुसार खनन माफिया अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियों, वन विभाग के अधीन क्षेत्रों तथा आबादी के निकट खुलेआम अवैध खनन में जुटे हुए हैं। प्रशासन, वन, पुलिस और खनिज विभाग की ओर से अवैध खनन की रोकथाम के लिए अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत वैर-भुसावर उपखंड में कई स्थानों पर नाके बनाए गए हैं, जहां वन विभाग ने बिट प्रभारी भी तैनात कर रखे हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी नियुक्त हैं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि यह अभियान केवल खानापूर्ति तक सीमित है।

ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व विभाग और खनन विभाग अब तक केवल पत्थर से भरे तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली ही पकड़ पाए हैं। उनका आरोप है कि अभियान में लगे अधिकारी और कर्मचारी मूक-बधिर बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जयपुर नेशनल हाईवे-21, धौलपुर मेघा हाईवे-45 तथा अन्य मार्गों पर पत्थर, बजरी और रेत से भरे डंपर, ट्रक और ट्रैक्टर-ट्रॉली खुलेआम दौड़ते हैं, लेकिन इन पर कार्रवाई नहीं होती। इसे लेकर ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। उनका आरोप है कि अभियान की खानापूर्ति के कारण खनन माफियाओं के हौसले बढ़े हुए हैं और उन्हें सुविधाएं मिल रही हैं, जिसके चलते खनन, राजस्व, वन, पुलिस और प्रदूषण विभाग चुप्पी साधे हुए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार वैर-बल्लभगढ़ मार्ग और घाटरी क्षेत्र के क्रेशर जोन की पहाड़ियों में, माइंदपुर में वन विभाग के पांच खसरों में से तीन खसरों में तथा राजस्व विभाग की पहाड़ियों में दिन-रात अवैध खनन होता है। उनका कहना है कि अवैध खननकर्ता खुलेआम खनन करते हैं और रात के समय पहाड़ों की खुदाई के लिए विस्फोट किए जाते हैं। रात में ट्रैक्टरों में पत्थर भर लिए जाते हैं और सुबह अंधेरे में उन्हें निकालकर वन विभाग, राजस्व विभाग और खनन प्रशासन की आंखों में धूल झोंकी जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम प्रशासन की जानकारी में होने के बावजूद जारी है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अवैध खनन करने वालों से क्रेशर संचालक भी सस्ते दामों पर पत्थर खरीदते हैं। उनका कहना है कि कई बार अवैध खनन रोकने और विस्फोट बंद कराने की मांग की गई, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। इसी प्रकार गांव मायदपुर के पास भी कई पहाड़ियों में अवैध खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वहां भी प्रशासन के अभियान की पालना नहीं होती और रात के समय क्रेशर संचालकों के सहयोग से खुलेआम अवैध खनन जारी रहता है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्रेशर संचालकों को मानव जीवन की चिंता नहीं है और वे केवल अपने कारोबार पर ध्यान दे रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन, वन और खनिज विभाग से मिलीभगत के चलते पहाड़ों पर खुलेआम विस्फोट कर खुदाई की जा रही है। इससे विस्फोट के दौरान पत्थर उछलकर आबादी क्षेत्र में गिरते हैं, जबकि क्रेशरों से उड़ने वाली धूल फसलों पर जम जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे घरों में दरारें आ रही हैं और फसलों की पैदावार पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। आसपास के ग्रामीणों के अनुसार रात में विस्फोटों की तेज आवाज से लोग भयभीत हो जाते हैं और उनकी नींद प्रभावित होती है। उनका कहना है कि कई बार विस्फोट के दौरान पहाड़ों से उछले पत्थर घरों तक पहुंचते हैं, जिससे मकानों में दरारें पड़ गई हैं।

ग्रामीणों के अनुसार गांव घाटरी, मंसापुरा, जसवर, सुआकी, कारवान, कोटकी, नयागांव खालसा, सुहारी, खोहरा, भौडागांव, हाथौडी, खातीपुरा, महाराजपुरा, सामन्तपुरा, पथैना, भुसावर, वैर और नीमली सहित अनेक स्थानों पर अवैध खनन जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार उपखंड अधिकारी राधेश्याम मीणा से अवैध खनन की शिकायत की। उनके अनुसार उपखंड अधिकारी का हर बार यही जवाब मिला कि खनन विभाग के साथ मिलकर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी न तो राजस्व विभाग ने कार्रवाई की और न ही खनन विभाग ने। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग केवल उजड़ती पहाड़ियों का नजारा देख रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस, राजस्व और खनन विभाग को पैसे दिए जाते हैं, इसलिए प्रशासन कार्रवाई नहीं करता।

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