श्रावण मास का शुभारंभ: भुसावर के मंदिरों और शिवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, फूल बंगला झांकी बनी आकर्षण

भुसावर में भगवान शिव को समर्पित श्रावण मास के शुभारंभ पर मंदिरों और शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। फूल बंगला झांकी आकर्षण का केंद्र रही। भगवान शिव के जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और सहस्त्र घट पूजन के महत्व को लेकर पण्डितों ने महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की।

Update: 2026-07-31 08:46 GMT

तस्वीर में भुसावर के एक मंदिर में श्रावण मास के उपलक्ष्य में सजाई गई रंग-बिरंगी फूल बंगला झांकी और सजावट दिखाई दे रही है।

भगवान शिव को समर्पित श्रावण मास का शुभारंभ 30 जुलाई, गुरुवार से हो गया। भुसावर सहित उपखंड मुख्यालय क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में स्थित मंदिरों और शिवालयों में सुबह से ही हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष गूंजते रहे। अल सुबह से ही श्रद्धालु रंग-बिरंगे परिधानों में सज-धजकर भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में पहुंचे।

श्रावण मास के प्रथम दिन भुसावर के हूंकारेश्वर महादेव मंदिर, बड़वाले शिम्भू हनुमान जी मंदिर, कोठी वाले हनुमान जी मंदिर, भगत राज वाले हनुमान जी मंदिर, बनखण्डी वाले हनुमान जी मंदिर, पंचमुखी हनुमान जी मंदिर, कुण्डा वाले हनुमान जी मंदिर, रात वाले हनुमान जी मंदिर तथा अथाई वाले हनुमान जी मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों और शिवालयों में दिनभर भगवान शिव की पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहा।

भुसावर के हिंडौन सड़क मार्ग स्थित प्राचीन कोठी वाले हनुमान जी मंदिर में सावन महोत्सव के उपलक्ष्य में रंग-बिरंगी रोशनी से सुसज्जित फूल बंगला झांकी सजाई गई, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया तथा बेलपत्र, धतूरा, भांग, दूध और गंगाजल अर्पित कर परिवार में सुख-शांति, समृद्धि, क्षेत्र की खुशहाली और प्रदेश में अच्छी बरसात की कामना की।

इस अवसर पर पण्डित पुष्पेन्द्र मिश्र, महेश शर्मा और गोपाल शास्त्री ने बताया कि श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग का रुद्राभिषेक और सहस्त्र घट पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला आध्यात्मिक साधन माना गया है। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ को समर्पित सावन माह में पार्थिव शिवलिंग पर पवित्र द्रव्यों से अभिषेक करने से मनुष्य को मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

उन्होंने बताया कि दूध से अभिषेक करने पर दीर्घायु और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है, जबकि पार्थिव शिवलिंग पर दही अर्पित करने से संतान सुख और वंश में वृद्धि होती है। वहीं घी अर्पित करने से स्वास्थ्य और शारीरिक शक्ति प्राप्त होने की मान्यता है। श्रावण मास के शुभारंभ के साथ भुसावर क्षेत्र के मंदिरों में श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास का वातावरण पूरे दिन बना रहा।

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