विद्या भारती के प्रधानाचार्य गढ़ रहे भविष्य के भारत की नींव, बारां में हुई समीक्षा और योजना बैठक
बारां में विद्या भारती की समीक्षा बैठक में शैक्षिक गुणवत्ता, संस्कार शिक्षा और आगामी सत्र की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
विद्या भारती शिक्षा संस्थान बारां की बैठक में उपस्थित पदाधिकारी नजर आ रहे हैं।
बारां। विद्या भारती के विद्यालयों में शिक्षा के साथ संस्कार, चरित्र निर्माण और राष्ट्रभक्ति को प्राथमिकता देते हुए प्रधानाचार्यों को भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। बारां जिले में आयोजित समीक्षा एवं योजना बैठक तथा दीपावली स्नेह मिलन समारोह में विद्यालयों की शैक्षिक गतिविधियों की समीक्षा के साथ आगामी सत्र की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
विद्या भारती शिक्षा संस्थान बारां के तत्वावधान में संचालित जिले के समस्त आदर्श विद्या मंदिर एवं स्वामी विवेकानंद विद्या निकेतन विद्यालयों के संस्था प्रधानों की बैठक मांगरोल बायपास रोड स्थित स्वामी विवेकानंद विद्या निकेतन विद्यालय के सभागार में आयोजित हुई। कार्यक्रम संयोजक दीनदयाल नागर एवं जिला प्रचार प्रमुख सत्यनारायण पांचाल ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदा एवं भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और वंदना के साथ किया गया।
बैठक में गत सत्र के कार्यों की समीक्षा करते हुए आगामी कार्ययोजना के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कक्षा-कक्ष में प्रभावी क्रियान्वयन, शैक्षिक गुणवत्ता एवं उन्नयन, संस्कृति बोध परियोजना, अभिभावक संपर्क एवं पीटीएम, कंप्यूटर शिक्षा, संस्कार केंद्र और शिशु वाटिका जैसे विषय शामिल रहे। इसके साथ ही बसंत पंचमी, घोष वर्ग, संत रविदास प्रकाशोत्सव, वार्षिक उत्सव, मातृ सम्मेलन तथा विद्या भारती अमृत महोत्सव के आयोजन को लेकर भी चर्चा की गई।
बैठक में जिला शिशु वाटिका संयोजक गिरिराज वर्मा, संकुल प्रमुख सत्यनारायण मेघवाल एवं छबड़ा प्रधानाचार्य अमृतलाल मीणा ने विभिन्न शैक्षिक विषयों पर अपने विचार रखे।
दीपावली स्नेह मिलन समारोह में विद्या भारती के जिला सचिव राजेंद्र कुमार शर्मा ने 'बदलते परिदृश्य में प्रधानाचार्य की भूमिका' विषय पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्य का दायित्व केवल विद्यालय का संचालन और नेतृत्व करना नहीं है, बल्कि उन्हें भविष्य के भारत के निर्माण का सशक्त माध्यम बनना होगा। विद्यालयों का लक्ष्य केवल विद्यार्थियों को शिक्षित करना अथवा उन्हें डिग्रियां दिलाना नहीं, बल्कि संस्कारवान, चरित्रवान, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत नागरिकों का निर्माण करना होना चाहिए।
राजेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने के केंद्र बनकर न रहें, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशालाओं के रूप में विकसित हों। ऐसे संस्थानों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व का निर्माण होने के साथ उनमें राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध भी जागृत होना चाहिए।
बैठक में उपस्थित सभी विद्यालयों के संस्था प्रधानों ने आगामी कार्ययोजना के निर्धारित लक्ष्यों को पूर्ण ऊर्जा और सामूहिक प्रयासों के साथ हासिल करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर कृष्ण कन्हैया पांचाल, नरेश प्रजापति, मानक चंद वैष्णव, रामनरेश योगी, नीरज रावल, शंभूदयाल पालीवाल, चौथमल शर्मा, जोधराज नागर एवं श्रीमती लक्ष्मी वर्मा सहित विभिन्न विद्यालयों के संस्था प्रधान और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अंत में आभार प्रदर्शन एवं शांति मंत्र के साथ बैठक का समापन हुआ।