शाहबाद अभ्यारण्य की 408 हेक्टेयर वन भूमि आवंटन के विरोध में महिलाओं की मानव श्रृंखला, आंदोलन हुआ तेज

बारां के शाहबाद संरक्षित वन अभ्यारण्य की 408 हेक्टेयर वन भूमि ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित किए जाने के विरोध में आंदोलन तेज हो गया है। महिला चौपाल समूह ने मानव श्रृंखला बनाकर शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन को समर्थन दिया और परियोजना पर रोक लगाने की मांग उठाई।

Update: 2026-08-03 12:24 GMT

तस्वीर में शाहबाद के जंगलों में 'हम जागेंगे, देश जगेगा चौपाल' का बैनर पकड़े हुए महिला चौपाल समूह की सदस्य और अन्य ग्रामीण नजर आ रहे हैं।

बारां जिले के शाहबाद संरक्षित वन अभ्यारण्य क्षेत्र की 408 हेक्टेयर बहुमूल्य वन भूमि को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा निजी बिजली परियोजना ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद को आवंटित किए जाने के विरोध में आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पर्यावरण, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी के संरक्षण की मांग को लेकर देशभर के पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ताओं द्वारा ‘शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन’ चलाया जा रहा है।

इसी क्रम में आंदोलन को और मजबूती देते हुए महिला चौपाल समूह, बारां की महिला सदस्य शाहबाद के जंगलों में पहुंचीं और वहां विशाल मानव श्रृंखला बनाकर ‘शाहपुरा पंप्ड स्टोरेज पावर प्लांट’ परियोजना का शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी विरोध दर्ज कराया। इस दौरान महिलाओं ने शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बारां द्वारा संचालित ‘शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन’ को अपना पूर्ण और सक्रिय समर्थन देने की घोषणा की।

मानव श्रृंखला के दौरान महिला चौपाल समूह की प्रतिनिधियों नीता शर्मा, जिया सोन, शालिनी कुमारी, निर्मला मेघवाल, नंदिनी सहित अन्य महिलाओं ने कहा कि शाहबाद का जंगल केवल दुर्लभ प्राकृतिक वनस्पतियों और वन्यजीवों का आश्रय स्थल ही नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की जलवायु, भूजल स्तर और स्थानीय समुदायों के अस्तित्व का प्रमुख आधार भी है। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट लाभ के लिए सैकड़ों हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि की बलि देना पर्यावरण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।

महिलाओं ने मांग की कि 408 हेक्टेयर वन भूमि को ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपने का निर्णय केंद्र और राज्य सरकार तत्काल वापस ले। साथ ही शाहबाद अभ्यारण्य को किसी भी प्रकार की औद्योगिक अथवा कॉरपोरेट व्यावसायिक गतिविधियों से पूरी तरह मुक्त घोषित किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि स्थानीय जनभावनाओं और पर्यावरण पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना पर रोक लगाई जाए।

शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति ने महिला चौपाल समूह के समर्थन पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक शाहबाद के जंगलों को बचाने से जुड़ा यह निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तब तक यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से और अधिक उग्र तथा व्यापक रूप में जारी रहेगा।

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