राजस्थान के बारां जिले में पुलिस ने ऑपरेशन पंचवाटिका के तहत तीन साल से फरार चल रही 12 हजार की इनामी महिला ठग संतोष बाई नागर को जयपुर के एक धार्मिक आश्रम से गिरफ्तार किया है।

बारां। राजस्थान के बारां जिले में पुलिस ने ऑपरेशन पंचवाटिका के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन साल से फरार चल रही ₹12 हजार की इनामी महिला ठग संतोष बाई नागर को जयपुर के एक धार्मिक आश्रम से गिरफ्तार किया है। आरोपी महिला साध्वी का भेष धारण कर वृंदावन समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों और आश्रमों में छिपकर रह रही थी। पुलिस के अनुसार, वह पहचान छिपाने और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदलती थी। उसके खिलाफ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं।

जिला पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासु ने बताया कि थाना छबड़ा में दर्ज प्रकरण संख्या 199/2023 में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406 और 120बी तथा प्रकरण संख्या 95/2026 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(2), 338, 336(2), 340(2) और 337 के तहत आरोपी वांछित थी। उसकी गिरफ्तारी पर 12 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

पुलिस के मुताबिक, संतोष बाई नागर पिछले करीब तीन वर्षों से फरार थी। वह वृंदावन, मथुरा, तिरुपति बालाजी, रामेश्वरम, उज्जैन महाकाल, पुष्कर और खाटूश्याम सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर साध्वी के रूप में रहकर पुलिस से बचती रही। इसके अलावा वह नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देशों में भी ठिकाने बदलती रही। कई जिलों की पुलिस उसकी तलाश कर रही थी, लेकिन लंबे समय तक उसका पता नहीं चल पाया।

पुलिस अधीक्षक को छबड़ा थाना पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर पता चला कि आरोपी धार्मिक स्थलों पर छिपकर रहती है और पुलिस के पहुंचने से पहले सतर्क हो जाती है। इसके बाद उसे उसी के तरीके से पकड़ने की योजना बनाई गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सौरभ तिवाड़ी और छबड़ा वृत्ताधिकारी ताराचंद आरपीएस के पर्यवेक्षण तथा छबड़ा थाना प्रभारी राजेश खटाना के नेतृत्व में ऑपरेशन पंचवाटिका के तहत विशेष टीम गठित की गई।

पुलिस टीम को साधु-संतों का भेष धारण करने और धार्मिक कर्मकांडों में शामिल होने का विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया। टीम के सदस्यों ने संस्कृत में मंत्रोच्चार और सुंदरकांड पाठ सहित धार्मिक गतिविधियों का अभ्यास किया, ताकि वे आश्रमों में सामान्य रूप से घुल-मिल सकें। इसके बाद टीम ने वृंदावन पहुंचकर उस आश्रम में प्रवेश किया, जहां आरोपी के छिपे होने की सूचना थी। पुलिसकर्मियों ने भगवा वस्त्र धारण किए और दाढ़ी बढ़ाकर अपनी पहचान छिपाई। आरोपी से घुल-मिलकर उसका विश्वास हासिल किया गया और उसे जयपुर स्थित एक धार्मिक आश्रम में आने के लिए प्रेरित किया गया। वहां पहुंचने पर उसे हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की गई और अपराध का सत्यापन करने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के अनुसार, आरोपी का गिरोह कोटा में यूआईटी द्वारा आवंटित भूखंडों और मकानों को निशाना बनाता था। वह ऐसे मकानों और भूखंडों की पहचान करती थी, जिनकी यूआईटी की किस्तें समय पर जमा नहीं होने के कारण आवंटन निरस्त हो गया था। इसके बाद खाली पड़ी जमीन और मकानों की तस्वीरें तथा वीडियो बनाकर उन संपन्न लोगों की पहचान की जाती थी, जो उसके जाल में फंस सकते थे।

आरोपी इन तस्वीरों और वीडियो के जरिए लोगों को मकान और भूखंडों की कीमत करोड़ों रुपये बताते हुए कम दाम पर दिलाने का झांसा देती थी। वह मकान या भूखंड का पट्टा बनवाने और रजिस्ट्री कराने की जिम्मेदारी लेकर सौदा करती थी। पुलिस के मुताबिक, गिरोह यूआईटी कोटा द्वारा जारी पट्टों और रजिस्ट्री की हूबहू जाली प्रतियां तैयार करता था। इन दस्तावेजों पर संबंधित अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर, मुहर और सील का इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद पीड़ितों को करोड़ों रुपये के मकान और भूखंडों के फर्जी दस्तावेज सौंप दिए जाते थे।

जब पीड़ित उन मकानों या भूखंडों का उपयोग करने अथवा उन्हें किसी अन्य व्यक्ति को बेचने का प्रयास करते थे, तब उन्हें पता चलता था कि संबंधित संपत्ति की रजिस्ट्री पहले ही हो चुकी है और उनके साथ जाली दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी की गई है। पुलिस के अनुसार, रजिस्ट्री विभाग में पट्टों की वैधता की जांच नहीं होने का फायदा उठाकर आरोपी अपने गिरोह के साथ कई लोगों को ठग चुकी थी। इस तरह कोटा क्षेत्र में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई।

पुलिस ने बताया कि जब पीड़ित अपने रुपये वापस मांगते थे, तो आरोपी उन्हें झूठे बलात्कार के मामलों में फंसाने और जान से मारने की धमकी देती थी। इसके कारण कई पीड़ित डर के चलते उसके खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराते थे। कुछ मामलों में आरोपी ने अपनी टीम के माध्यम से हनी ट्रैप की वारदातों को भी अंजाम दिया था।

आरोपी को पकड़ना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था। वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करती थी और गिरफ्तारी से बचने के लिए अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर साध्वी का रूप धारण कर रहती थी। पुलिस के पास उसकी करीब 20 साल पुरानी तस्वीरें थीं। इसके अलावा वह हर एक-दो दिन में रेल और हवाई यात्रा के जरिए कम समय में अपना ठिकाना बदल लेती थी। कोटा रेंज के कई थानों में उसके खिलाफ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले दर्ज थे और विभिन्न जिलों की पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।

ऑपरेशन पंचवाटिका के तहत गठित विशेष टीम ने आरोपी के संभावित ठिकानों, परिजनों, रिश्तेदारों और परिचितों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए पिछले करीब छह महीने तक लगातार काम किया। टीम के दो सदस्य, रूडमल एसआई और घनश्याम आरटी 1184, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों पर गुप्त रूप से पहुंचे। उन्होंने अपनी पहचान छिपाकर भगवा वस्त्र धारण किए और साधु के रूप में रहने का प्रशिक्षण लिया। संस्कृत में मंत्रोच्चार और सुंदरकांड पाठ जैसी गतिविधियों का अभ्यास करने के बाद उन्होंने सूचना संकलन और मैदानी सत्यापन किया। इस प्रक्रिया के जरिए आरोपी के संभावित ठिकानों और गतिविधियों की जानकारी जुटाई गई।

पुलिस के अनुसार, सटीक सूचना संकलन के आधार पर बारां जिले में परिवादी के साथ धोखाधड़ी कर जाली दस्तावेज तैयार करने और 1.25 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में वांछित संतोष बाई नागर को जयपुर के एक धार्मिक आश्रम से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद अनुसंधान पूरा करते हुए उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान संतोष बाई नागर, पुत्री रामप्रसाद, जाति नागर, निवासी मकान नंबर ए-20, रिद्धि-सिद्धि कॉलोनी, बालोता रोड, थाना कुन्हाड़ी, जिला कोटा शहर, राजस्थान के रूप में हुई है।

इस कार्रवाई में थाना छबड़ा के थाना प्रभारी राजेश कुमार खटाना, उपनिरीक्षक रूडमल और आरटी 1184 घनश्याम की विशेष भूमिका रही। पुलिस टीम में पारथी महिला कांस्टेबल 1116 और गीता महिला कांस्टेबल 995 भी शामिल थीं। ऑपरेशन पंचवाटिका के तहत की गई इस कार्रवाई से लंबे समय से फरार आरोपी की गिरफ्तारी संभव हुई।

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