मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग तेज, वनवासी कल्याण परिषद ने सौंपा ज्ञापन
राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद ने मानगढ़ धाम के संरक्षण और जनजातीय बलिदानियों को राष्ट्रीय पहचान देने के लिए राष्ट्रपति व पीएम के नाम ज्ञापन दिया।
बारां में राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद और वनवासी कल्याण आश्रम के प्रतिनिधि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए।
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले स्थित मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद एवं वनवासी कल्याण आश्रम ने केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। संगठन की ओर से जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राजस्थान के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मानगढ़ धाम को अविलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने तथा इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण एवं विकास सुनिश्चित करने की मांग की गई।
बारां में इस मांग को लेकर दिए गए ज्ञापन में जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को राष्ट्रीय पहचान दिलाने और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण पर जोर दिया गया। चिंताराम सहरिया ने कहा कि मानगढ़ धाम जनजातीय समाज के संघर्ष, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए दिए गए बलिदान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देकर इसकी ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की आवश्यकता है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। गोविंद गुरु के नेतृत्व में संचालित भगत आंदोलन ने जनजातीय समाज में जागृति, सामाजिक सुधार, स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ पहाड़ी पर अंग्रेजी शासन की ओर से की गई गोलीबारी में बड़ी संख्या में जनजातीय महिला, पुरुष और बाल आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का अत्यंत मार्मिक और महत्वपूर्ण अध्याय है।
ज्ञापन के अनुसार, भगत आंदोलन जनजातीय समाज की अस्मिता की रक्षा, सामंती शोषण और अन्यायपूर्ण औपनिवेशिक व्यवस्था के विरोध में संचालित किया गया था। मानगढ़ का बलिदान केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित देश के जनजातीय समाज की साझा ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। इस बलिदान ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता की चेतना को और प्रखर किया।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2022 को मानगढ़ धाम की यात्रा के दौरान इसे राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के वीर, देशभक्त एवं स्वाभिमानी समाज की साझा राष्ट्रीय विरासत के रूप में रेखांकित किया था। वहीं, राष्ट्रपति ने 4 अक्टूबर 2024 को मानगढ़ धाम पहुंचकर जनजातीय बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
संगठन की ओर से राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की अनुशंसा और अगस्त 2022 में प्रस्तुत शोध-आधारित रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया। रिपोर्ट में मानगढ़ पहाड़ी के उस पवित्र स्थल को अविलंब राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की अनुशंसा की गई थी, जहां जनजातीय समाज ने स्वतंत्रता और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए बलिदान दिया था।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने, जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को उचित पहचान दिलाने और इस विरासत के संरक्षण एवं विकास की मांग दोहराई।
इस अवसर पर नरेंद्र कुमार विभाग संगठन मंत्री, विभाग मंत्री गौरव गुप्ता, चिंताराम सहरिया, जिला अध्यक्ष राकेश भील, जिला संगठन मंत्री, भारत पोरवाल जिला उपाध्यक्ष, गौरव अग्रवाल, रघुवीर महाराज, ऋषभ महाराज, पदम गौतम जिला सहकोषाध्यक्ष, गंगाराम मीणा जिला कोषाध्यक्ष, भोगीलाल सहरिया, मेघराज मीणा, बृजेश गुप्ता व्यवस्था प्रमुख, लालाराम, विजेंद्र सिंह, ओम प्रकाश, भगवान लाल, गिरिराज, विष्णु प्रसाद, केशव, सोनू चौधरी, सुरेश कुमार सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।