बारां में लोकमंथन यात्रा के दौरान मंच पर प्रस्तुतियां देते कलाकार।

बारां में लोकमंथन यात्रा के दौरान भारतीय लोकजीवन, लोक परंपराओं, कला-संस्कृति, साहित्य, ग्रामीण खेलों और ज्ञान-विज्ञान की विविध झलकियां देखने को मिलीं। ‘हम भारत के लोग’ के भाव को आत्मसात करते हुए निकली इस यात्रा का अन्नपूर्णा की पावन धरा बारां पर भारतीय परंपराओं और आत्मीयता के साथ भव्य स्वागत किया गया। शिक्षक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सहित विभिन्न सामाजिक एवं वैचारिक संगठनों और नगर के गणमान्य नागरिकों ने यात्रा का अभिनंदन किया।

लोकमंथन यात्रा के संयोजक श्याम बाबू मेहता ने बताया कि यात्रा के माध्यम से भारतीय लोकजीवन की विविध परंपराओं, कला-संस्कृति, साहित्य, ग्रामीण खेलों और ज्ञान-विज्ञान के विभिन्न आयामों को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय चौराहा पर संस्कृत भारती, लघु उद्योग भारती और इतिहास संकलन समिति की ओर से आकर्षक प्रदर्शनियां लगाई गईं। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से भारतीय भाषा, स्वदेशी उद्यम और गौरवशाली इतिहास के विभिन्न पक्षों से आमजन को परिचित कराया गया।

लंका कॉलोनी में क्रीड़ा भारती ने पारंपरिक ग्रामीण खेलों की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। वहीं, विज्ञान भारती की ओर से आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संबंधित विभिन्न जानकारियां प्रदर्शित की गईं। इन गतिविधियों में बड़ी संख्या में नागरिकों और युवाओं ने सहभागिता की।

सायंकाल लंका कॉलोनी स्थित प्रीत गार्डन में आयोजित रंगमंचीय समारोह राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति, लोक परंपराओं और गौरवशाली सांस्कृतिक वैभव का त्रिवेणी संगम बना। संस्कार भारती के कलाकारों ने तेजाजी गायन, हीड़ गायन और रावटा जैसी लोकविधाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों से राजस्थान की जीवंत लोकधारा को मंच पर साकार किया।

साहित्य परिषद से जुड़े कवियों और साहित्यकारों ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं के माध्यम से समारोह में राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। विद्या भारती के बाल कलाकारों ने संस्कृति और संस्कारों से जुड़े लोकगीतों की प्रभावशाली प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। केलवाड़ा का सहरिया सॉन्ग, भंवरगढ़ का योग पिरामिड तथा पालायथा का भरतनाट्यम समारोह के प्रमुख आकर्षण रहे। विभिन्न लोकविधाओं और कलात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से बारां की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध लोकजीवन की झलक सामने आई।

लोकमंथन यात्रा के अंतर्गत अधिवक्ता परिषद की ओर से संस्था धर्मदा धर्मशाला में संविधान संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, सार्वजनिक विभाग, जसवंत खत्री रहे।

लोक प्रदर्शन मंच के प्रमुख वक्ता और यात्रा संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने ‘वर्तमान समय में लोक परंपराओं एवं लोकमान्यताओं की प्रासंगिकता’ विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमारी लोक परंपराएं केवल अतीत की स्मृतियां नहीं, बल्कि भारतीय समाज की जीवंत सांस्कृतिक चेतना हैं। इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।

डॉ. कुमावत ने कहा कि भारत की लोककलाएं और लोक परंपराएं अत्यंत समृद्ध हैं तथा विश्व पटल पर अपना विशिष्ट स्थान रखती हैं। इनके संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक हस्तांतरण से भारत पुनः विश्व में गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त करेगा। उन्होंने भारतीय संस्कृति को विश्व बंधु और समस्त मानवता के कल्याण का विचार करने वाली संस्कृति बताया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर और सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ के साथ किया। कार्यक्रम का संचालन विद्या भारती के जिला सचिव राजेंद्र कुमार शर्मा ने किया। लोकमंथन यात्रा के माध्यम से बारां में लोककलाओं, पारंपरिक ज्ञान, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े विविध विषयों को प्रस्तुत किया गया।

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