बारां टीचर ट्रेनिंग सेंटर में शारदीय नवरात्र उत्सव, गरबा-डांडिया में झलकी भारतीय संस्कृति
बारां के टीचर ट्रेनिंग सेंटर कॉलेज में शारदीय नवरात्रि उत्सव के दौरान मां दुर्गा की आराधना, नवदुर्गा पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और गरबा-डांडिया का आयोजन हुआ। संदीप जैन सहित कॉलेज स्टाफ और विद्यार्थियों ने उत्सव में भाग लिया।
बारां के टीचर ट्रेनिंग सेंटर कॉलेज परिसर में शारदीय नवरात्रि पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान डांडिया स्टिक हाथों में लेकर समूह फोटो खिंचवाते विद्यार्थी, मुख्य अतिथि और कॉलेज स्टाफ।
बारां स्थित टीचर ट्रेनिंग सेंटर कॉलेज के प्रांगण में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें छात्र-छात्राओं और कॉलेज के स्टाफ ने भाग लिया। रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों, मां दुर्गा की तस्वीरों और झांकी से सजे परिसर में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं।
कार्यक्रम में नीतू गुप्ता को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। महोत्सव का शुभारंभ कॉलेज के प्रबंधक संदीप जैन ने किया। इस दौरान कॉलेज के कोर्स कोऑर्डिनेटर अजीत कुमार उपाध्याय, विशेष श्रेणी विद्यालय की प्रिंसिपल राजेश नागर और सहयोगी स्टाफ के सदस्य किरण मीणा, शिवानी शर्मा, निशा, रामनिश, अनीता, नीलेश गुर्जर, देवकीनंदन, करीना सहित अन्य उपस्थित रहे। सभी ने मां दुर्गा की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित किया और आरती गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की।
कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शारदीय नवरात्रि के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को भारतीय संस्कृति और समृद्ध विरासत से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसके बाद छात्राओं ने मां दुर्गा के नौ रूपों यानी नवदुर्गा पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों को दर्शाया गया।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण डांडिया और गरबा नृत्य रहा। छात्र-छात्राएं पारंपरिक गुजराती परिधानों, जैसे चनिया-चोली और केडियू, में सजकर कार्यक्रम में पहुंचे। गुजराती लोक धुनों पर विद्यार्थियों के साथ महिला शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों ने भी डांडिया और गरबा नृत्य में भाग लिया। धार्मिक आराधना से शुरू हुआ यह आयोजन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारंपरिक नृत्य के माध्यम से कॉलेज परिसर में नवरात्रि उत्सव की परंपरा को दर्शाता रहा।