बारां पंचायतीराज चुनाव: बसपा के हाथ से मैदान में उतरेगा थर्ड फ्रंट
आम आदमी पार्टी से चुनाव चिन्ह न मिलने पर थर्ड फ्रंट ने बसपा के 'हाथी' निशान पर पंचायतीराज चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
बारां पंचायतीराज चुनाव में भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के चुनाव चिन्हों के साथ मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है।
बारां में पंचायतीराज चुनाव के दौरान भाजपा के कमल और कांग्रेस के हाथ के पंजे को चुनौती देने के लिए थर्ड फ्रंट अब बहुजन समाज पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी के साथ मैदान में उतरेगा। पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव में थर्ड फ्रंट का चुनाव चिन्ह आम आदमी पार्टी की झाड़ू के स्थान पर हाथी होगा। इससे जिले में चुनावी मुकाबले के त्रिकोणीय होने की संभावना है।
राजेंद्र शर्मा के अनुसार, पिछले नगर परिषद चुनाव में थर्ड फ्रंट ने आम आदमी पार्टी के चुनाव चिन्ह झाड़ू को अपनाकर भाजपा और कांग्रेस के चुनावी समीकरण बिगाड़ दिए थे। उस चुनाव में बारां नगर परिषद के कुल 60 वार्डों में से 31 वार्डों पर जीत दर्ज कर थर्ड फ्रंट ने अपना बोर्ड भी बना लिया था।
नगर परिषद चुनाव में मिली सफलता के बाद पंचायतीराज चुनाव को लेकर भी कुछ दिनों तक यह चर्चा चलती रही कि थर्ड फ्रंट इस बार भी झाड़ू के चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरेगा। हालांकि, उच्च स्तरीय राजनीतिक कारणों के चलते आम आदमी पार्टी ने पंचायतीराज चुनाव के लिए थर्ड फ्रंट को अपना चुनाव चिन्ह आवंटित नहीं किया।
इसके बाद थर्ड फ्रंट ने बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारी से संपर्क किया और पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी को अपना चुनाव चिन्ह बनाने का निर्णय लिया। अब पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव में थर्ड फ्रंट हाथी के साथ चुनावी मुकाबले में उतरेगा। वहीं, भाजपा का चुनाव चिन्ह कमल और कांग्रेस का चुनाव चिन्ह हाथ का पंजा रहेगा।
इस तरह बारां में पंचायतीराज चुनाव के दौरान हाथी, कमल और हाथ के पंजे के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन रही है। हालांकि, चुनाव में वास्तविक राजनीतिक स्थिति और विभिन्न दलों की ताकत का आकलन टिकट वितरण के बाद ही हो सकेगा।
पंचायतीराज चुनाव में कांग्रेस और भाजपा ने पूरी दमखम के साथ मैदान में उतरने का निर्णय लिया है। वहीं, थर्ड फ्रंट ने भी चुनाव में कोई कसर बाकी नहीं रखने की रणनीति बनाई है। ऐसे में नगर परिषद चुनाव में 60 में से 31 वार्ड जीतकर अपना बोर्ड बनाने वाले थर्ड फ्रंट के सामने अब पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव में अपने प्रभाव को कायम रखने की चुनौती होगी।