अल नीनो का महा-संकट: रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से तप रहा समुद्र, क्या भारत में मंडरा रहा है भीषण सूखे और तबाही का खतरा?
प्रशांत महासागर की सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से विश्व मौसम संगठन ने दक्षिण एशिया में कम बारिश और अधिक गर्मी की चेतावनी दी है।
प्रशांत महासागर में अल नीनो के प्रभाव से समुद्र की सतह के गर्म होने और मौसमी बदलावों को दर्शाती उपग्रह तस्वीर तथा ऊंची लहरें।
दुनिया भर में अल नीनो के कारण मौसम के मोर्चे पर एक बड़ा संकट खड़ा होता दिख रहा है। प्रशांत महासागर में अल नीनो के प्रभाव से पानी का तापमान इतिहास के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी संस्था 'नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन' (NOAA) के अनुसार, 22 अक्टूबर को मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान 30°C दर्ज किया गया। यह उपलब्ध रिकॉर्ड में अब तक का सबसे अधिक तापमान है। अल नीनो का यह असामान्य रूप से मजबूत होना दुनिया भर में मौसम के बदलाव को लेकर चिंताएं बढ़ा रहा है, और भारत में भी इसके लगातार असर से फिक्र बढ़ गई है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने जानकारी दी है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। ऐसा अनुमान है कि दिसंबर के आसपास अल नीनो अपने चरम पर होगा, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में असामान्य मौसम देखने को मिल सकता है।
प्रशांत महासागर का गर्म होना क्यों चिंताजनक है?
अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमी प्रक्रिया है, जिसमें मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इस गर्मी के कारण हवाओं की गति और बारिश लाने वाले बादलों की आवाजाही प्रभावित होती है। इसके चलते महासागर से दूर स्थित इलाकों में भी मौसम का मिजाज और पैटर्न बदल जाता है।
इस साल अल नीनो विशेष रूप से बहुत शक्तिशाली साबित हो रहा है। WMO के आंकड़ों के मुताबिक, नीनो 3.4 नामक क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान जून में सामान्य से 1.6°C अधिक था, जो अगस्त तक बढ़कर 2.5°C अधिक हो गया। अक्टूबर से दिसंबर के दौरान यह सामान्य से 3.7°C तक अधिक हो सकता है। यह स्तर नवंबर 2015 से जनवरी 2016 के बीच दर्ज किए गए 2.6°C के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगा। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि महासागर का तापमान अपने लंबे समय के औसत से कितना ज्यादा बढ़ा है।
भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?
अल नीनो का सीधा असर भारत पर भी पड़ेगा। भारत की खेती और जल संसाधन काफी हद तक मानसून पर निर्भर हैं, और अल नीनो का बढ़ना कम बारिश और बढ़ते तापमान को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश सामान्य से 13% कम दर्ज की गई है।
WMO के अक्टूबर पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले महीनों में दक्षिण एशिया के बड़े हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहने का संकेत है। हालांकि बारिश की स्थिति अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है, लेकिन अक्टूबर से दिसंबर के दौरान दक्षिण एशिया के मध्य और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भागों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना अधिक जताई गई है।
भारत के मौसम पर असर
यह ध्यान रखना जरूरी है कि अल नीनो अकेला भारत के मौसम को तय नहीं करता है; अन्य जलवायु पैटर्न और स्थानीय स्थितियां भी बारिश और तापमान पर असर डालती हैं। हालांकि, प्रशांत महासागर के पानी का इस तरह असामान्य रूप से गर्म होना खराब मौसम, भीषण गर्मी और बारिश के पैटर्न में बदलाव के जोखिम को काफी बढ़ा देता है।