उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 200 पार होने पर ग्रैप-1 के तहत निर्माण स्थलों पर सख्ती बढ़ा दी है।

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में जैसे-जैसे मौसम बदल रहा है, वैसे-वैसे हवा की गुणवत्ता भी बिगड़ने लगी है। ठंड की आहट के बीच वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पूरी तरह से हरकत में आ गया है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के 200 का आंकड़ा पार करते ही ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप के पहले चरण (GRAP-1) को सख्ती से लागू कर दिया गया है।

आज की स्थिति और आज के मौसम के मिजाज को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से सटे पूरे एनसीआर इलाके में कड़े नियम लागू करने के आदेश जारी किए हैं। इसके तहत उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी नियम तोड़ने वाली निर्माण साइटों, कारखानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई का दायरा काफी बढ़ा दिया है। अधिकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि पर्यावरण संबंधी मानकों की अनदेखी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

30 निर्माण स्थलों का औचक निरीक्षण, 75 लाख का जुर्माना प्रस्तावित

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नोएडा क्षेत्रीय अधिकारी रितेश तिवारी से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर और नवंबर के दौरान विभाग की विशेष टीमों ने क्षेत्र के लगभग 30 निर्माण स्थलों (Construction Sites) पर अचानक पहुंचकर निरीक्षण किया। इस जांच पड़ताल के दौरान 17 निर्माण स्थलों पर प्रदूषण रोकने से जुड़े जरूरी मानकों की खुली अवहेलना और उल्लंघन पाया गया।

नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली इन 17 निर्माण साइटों पर विभाग द्वारा कुल मिलाकर लगभग 75 लाख रुपये का आर्थिक दंड (जुर्माना) लगाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। विभाग की अलग-अलग टीमें निर्माण गतिविधियों और हवा में प्रदूषण घोलने वाले अन्य संभावित स्रोतों पर लगातार नजर रख रही हैं, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तय कानूनी प्रक्रिया के तहत सख्त कार्रवाई की जा सके।

आरएमसी और हॉट मिक्स प्लांटों पर 1.28 करोड़ का अर्थदंड

नोएडा का पुस्ता रोड क्षेत्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की विशेष निगरानी में है। इस इलाके में बड़े पैमाने पर चल रहे रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) और हॉट मिक्स प्लांटों पर प्रदूषण फैलाने के गंभीर आरोप हैं। क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि मानकों का अनुपालन न करने वाले इन संस्थानों पर विभाग द्वारा अब तक लगभग 1 करोड़ 28 लाख रुपये का जुर्माना ठोका जा चुका है।

हालांकि, इन प्लांटों से होने वाले प्रदूषण पर पूरी तरह से रोक लगाना विभाग के सामने अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें रोजाना इन प्लांटों की चेकिंग कर रही हैं। विभाग ने फिर दोहराया है कि जिन भी औद्योगिक या व्यावसायिक इकाइयों में नियमों की अनदेखी मिलेगी, उनके खिलाफ बिना किसी रियायत के नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सार्वजनिक की जा रही है कार्रवाई की जानकारी

अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान जो भी साइटें या संस्थान तय मानकों से हटकर काम करते पाए जा रहे हैं, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है। इसके साथ ही, विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर भी सार्वजनिक की जा रही है। ऐसा करने के पीछे मुख्य उद्देश्य नागरिकों के बीच वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रति जागरूकता फैलाना है, ताकि निर्माण से जुड़ी एजेंसियां और निजी बिल्डर तय मानकों का पूरी जिम्मेदारी से पालन करने के लिए प्रेरित हों।

GRAP-1 लागू होने के बाद उठाए जा रहे कड़े कदम

क्षेत्र में ग्रैप का पहला चरण प्रभावी होते ही ज़मीनी स्तर पर वायु प्रदूषण रोकने के लिए बहुस्तरीय कदम उठाए जा रहे हैं:

  • सड़कों की धूल हटाने के लिए मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें चलाई जा रही हैं।
  • धूल को हवा में उड़ने से रोकने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जा रहा है और एंटी-स्मॉग गन का प्रयोग तेज कर दिया गया है।
  • खुले स्थानों में किसी भी तरह का कचरा, प्लास्टिक, सूखी पत्तियां या अपशिष्ट पदार्थ जलाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  • होटल, रेस्तरां और खुले में भोजन बेचने वाले ढाबों/दुकानों को तंदूर में कोयला या लकड़ी का इस्तेमाल न करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं और इस पर कड़ाई से अमल कराया जा रहा है|

खराब सड़कों से उड़ती धूल बड़ी समस्या, जल्द निर्माण की उम्मीद

नोएडा क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता खराब होने के पीछे मुख्य कारणों में टूटी-फूटी और खराब सड़कों से लगातार उड़ने वाली धूल भी शामिल है। क्षेत्रीय अधिकारी रितेश तिवारी ने बताया कि इस समस्या को हल करने के लिए नोएडा प्राधिकरण और सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों से कई बार सीधी बातचीत की गई है। साथ ही पत्राचार के माध्यम से भी सड़कों की बदहाल स्थिति से अवगत कराया गया है।

अधिकारियों को सूचना मिली है कि सिंचाई विभाग को संबंधित सड़क का निर्माण कार्य कराने के लिए आवश्यक धनराशि आवंटित कर दी गई है। सिंचाई विभाग ने भी भरोसा दिलाया है कि बहुत जल्द सड़क निर्माण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उम्मीद है कि सड़क की मरम्मत और निर्माण पूरा होते ही सड़कों की धूल से होने वाले प्रदूषण में बहुत बड़ी कमी आएगी।

दिल्ली-एनसीआर में मौसम और हवा की स्थिति को देखते हुए मैदानी निरीक्षण, निर्माण स्थलों की निगरानी और डिफॉल्टर्स पर कार्रवाई का यह सिलसिला लगातार जारी रहेगा।