तस्वीर में रोती महिला फोन और तीन युवकों की तस्वीर हाथ में लिए बैठी है।

मुजफ्फरनगर और शामली के तीन युवक उच्च शिक्षा और कॅरिअर बनाने के लिए रूस गए थे, लेकिन अब संदिग्ध परिस्थितियों में उनके फंसे होने और परिजनों से संपर्क टूटने का मामला सामने आया है। परिजनों ने विदेश मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। परिजनों के अनुसार, तीनों युवकों से 30 जुलाई के बाद कोई फोन संपर्क नहीं हुआ है और उनके मोबाइल लगातार बंद आ रहे हैं।

प्राप्त विवरण के अनुसार, मुजफ्फरनगर के चरथावल क्षेत्र के बाढ़ गांव निवासी हिमांशु शर्मा, पीपलशाह गांव निवासी शक्ति पुत्र विपिन पुंडीर और शामली जिले के हसनपुर लुहारी निवासी आशू सैनी पुत्र राकेश कुमार रूस में एक ही कमरे में रहकर पढ़ाई और काम कर रहे थे। तीनों युवकों के परिजनों का कहना है कि 30 जुलाई के बाद से उनसे संपर्क नहीं हो सका है।

हिमांशु की मां सुमन देवी और शक्ति के पिता विपिन पुंडीर ने बताया कि दोनों से 30 जुलाई को बातचीत हुई थी। इसके बाद रक्षाबंधन के त्योहार पर बहनों ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन बंद होने के कारण बात नहीं हो सकी। वहीं, मॉस्को स्टेट लिंग्विस्टिक यूनिवर्सिटी में भाषा विज्ञान का कोर्स कर रहे शामली के आशू सैनी की बहन अंशुल की भी 30 जुलाई को उससे बात हुई थी। आशू ने कहा था कि वह ‘कल फिर बात करेगा’, लेकिन इसके बाद उसका फोन लगातार बंद आ रहा है।

पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया है कि रूसी प्रशासन और स्थानीय नेटवर्क द्वारा युवकों को ड्रग्स के झूठे मुकदमों में फंसाने का भय दिखाकर जबरन रूस की सेना में भर्ती होने का दबाव बनाया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि फोन बंद होने और संपर्क टूटने के बाद तीनों युवकों के घरों में चिंता का माहौल है।

इस मामले में किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के सैकड़ों युवक स्टडी वीजा के नाम पर रूस जाकर इस नेटवर्क में फंस चुके हैं। उनका कहना है कि देश के विभिन्न राज्यों में धन ऐंठने और ठगी कर युवकों को विदेश भेजने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। किसान परिवार अपने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए उन्हें विदेश में उच्च शिक्षा दिलाने का प्रयास करते हैं और अनाधिकृत एजेंटों के झांसे में फंस जाते हैं। ऐसे अनेक मामले सामने आ चुके हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर आदि राज्यों के सैकड़ों युवक स्टडी वीजा के नाम पर रूस जाकर इस नेटवर्क में फंस चुके हैं।

शामली के हसनपुर लुहारी निवासी आशू सैनी के परिजनों ने रूस स्थित विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क साधने का प्रयास किया। परिजनों के मुताबिक, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उन्हें जानकारी दी गई कि आशू को रूसी सेना के लोग अपने साथ ले गए हैं। हालांकि, उसे किस वजह से ले जाया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं दी गई।

आशू के पिता राकेश कुमार का दावा है कि जिस एजेंट के जरिए उनके बेटे को विदेश भेजा गया था, वह अब मदद करने के बजाय सोशल मीडिया पर धमकियां दे रहा है। इसके बाद परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर तीनों युवकों की सकुशल बरामदगी और भारत वापसी की गुहार लगाई है।

परिजनों की ओर से विदेश मंत्रालय को दी गई जानकारी में आरोप लगाया गया है कि स्टडी और वर्क वीजा पर गए भारतीय युवकों को वहां परिवार से बात नहीं करने दी जा रही है। जो युवक रूसी सेना में शामिल होने से मना करते हैं, उन पर ड्रग्स रखने के फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर जेल भेजने या सजा दिलाने का दबाव बनाया जाता है। परिजनों का कहना है कि पूर्व में भी कई युवकों के शव भारत लाए जा चुके हैं।

जनप्रतिनिधियों के माध्यम से यह मामला विदेश मंत्री एस. जयशंकर तक भी पहुंचाया गया है, लेकिन अभी तक इस संबंध में क्या कार्रवाई की गई, इसकी कोई जानकारी परिजनों को नहीं मिली है। तीनों युवकों से 30 जुलाई के बाद संपर्क नहीं होने और उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण परिवारों ने अब विदेश मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई है।

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