मिर्जापुर में खाद्य रसद मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय के सामने उठीं खरीद नीति की खामियां, 23 अक्टूबर को होगी बैठक
खाद्य रसद मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने मिर्जापुर में विभागीय समीक्षा बैठक की और कर्मचारियों की समस्याएं सुनीं.
तस्वीर में खाद्य एवं रसद राज्य मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय मिर्जापुर के विंध्याचल में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान नजर आ रहे हैं.
मिर्जापुर में राज्य के खाद्य रसद मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय बुधवार को विंध्याचल पहुंचे, जहां उन्होंने मां विंध्यवासिनी देवी, अष्टभुजा देवी और महाकाली देवी का विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उन्होंने अष्टभुजा स्थित गेस्ट हाउस में विभागीय समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान मंत्री ने सरकार की गेहूं और धान खरीद नीति की सराहना करते हुए किसानों की उन्नति को प्राथमिकता देने की बात कही। वहीं, कर्मचारियों और कर्मचारी नेताओं ने विभाग में व्याप्त विसंगतियों तथा धान खरीद प्रक्रिया में आ रही समस्याओं को उनके सामने रखते हुए समाधान की मांग की।
खाद्य रसद मंत्री मनोज कुमार पाण्डेय ने सरकार की खरीद नीति की प्रशंसा करते हुए कहा कि किसान खुशहाल होंगे तो देश खुशहाल होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खरीद प्रक्रिया को बिचौलियों से मुक्त कराकर किसानों को राहत देने का काम कर रही है। समीक्षा बैठक में मंत्री ने सरकार और विभाग की उपलब्धियां भी गिनाईं। इस दौरान राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारियों ने विभागीय समस्याओं और मौजूदा क्रय नीति में व्याप्त विसंगतियों की ओर उनका ध्यान आकृष्ट कराया तथा समस्याओं के निवारण के लिए पत्र सौंपा।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय उपाध्यक्ष नारायण दुबे ने वर्तमान धान खरीद व्यवस्था, क्रय नीति और विभाग में व्याप्त विभिन्न विसंगतियों को विस्तार से उठाया। उन्होंने समस्याओं के समाधान के लिए सुझाव भी दिए। इस पर समस्याओं के शीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया गया। साथ ही लखनऊ में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के लिए 23 अक्टूबर 2026 की तिथि घोषित की गई।
क्रय नीति और विभागीय व्यवस्था के संबंध में परिषद ने बताया कि किसानों के पंजीकरण में अनेक समस्याएं सामने आ रही हैं। जिन किसानों ने फार्मर आईडी बनवाई है, उनके दर्ज विवरण में छूटे हुए रकबे को शामिल करने के लिए संशोधन की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। चकबंदी वाले किसानों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। परिषद ने यह भी बताया कि चावल मिलर्स को पहले दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के संबंध में मुख्यमंत्री के आदेश को भी नजरअंदाज कर दिया गया है।
परिषद के प्रांतीय उपाध्यक्ष नारायण जी दुबे ने कहा कि इस वर्ष के शासनादेश में मजदूरों से अंगूठा लगवाने और क्रय केंद्रों पर कैमरे लगाने सहित कई ऐसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है, जिनसे समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव सन्निकट होने के बावजूद इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने मुख्यालय में बैठे अधिकारियों की लापरवाही के कारण सरकार की वित्तीय राशि का अत्यधिक अपव्यय होने का आरोप भी लगाया।
कर्मचारी नेताओं ने खाद्य रसद मंत्री को क्रय केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्रय केंद्र पर कम से कम पांच हजार कुंतल क्षमता वाला गोदाम और कार्यालय होना चाहिए। बैठक में उठाए गए इन मुद्दों के बीच 23 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रस्तावित बैठक को विभागीय विसंगतियों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।