मिर्जापुर: सीएम योगी से मिलने से पहले करणी सेना जिलाध्यक्ष हाउस अरेस्ट, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
विंध्याचल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन से पहले करणी सेना के जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार को हाउस अरेस्ट कर एसडीएम को मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
मिर्जापुर में हाउस अरेस्ट के दौरान एसडीएम दीक्षा पांडे को मांगों का पत्रक सौंपते करणी सेना जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार व पदाधिकारी।
मिर्जापुर में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मांगपत्र सौंपने से पहले ही प्रशासन ने पिछली रात से हाउस अरेस्ट कर लिया। संगठन सवर्ण आयोग के गठन, ईडब्ल्यूएस की विसंगतियां दूर करने, यूजीसी के कथित काले कानून को वापस लेने और एससी-एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री से मिलना चाहता था। जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ की कहावत चरितार्थ हो रही है और जनसेवक तानाशाह शासक बन बैठे हैं, जबकि अपनी फरियाद लेकर पहुंचने वाले लोगों को मुलजिम बना दिया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनपद मिर्जापुर के विंध्याचल क्षेत्र में भ्रमण के दौरान श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की जिला इकाई उनके समक्ष अपनी मांगें रखने और ज्ञापन सौंपने वाली थी। इसी उद्देश्य से जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने तैयारी की थी। हालांकि, प्रशासन ने पिछली रात ही दिलीप सिंह गहरवार को हाउस अरेस्ट कर लिया। इसके बाद एसडीएम दीक्षा पांडे पुलिस बल के साथ उनके घर पहुंचीं और वहीं पर मांगों से संबंधित पत्रक प्राप्त किया।
संगठन ने इस कार्रवाई के बाद प्रदेश में सामान्य वर्ग की स्थिति पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि सवर्णों की समस्याओं और मांगों की अनदेखी की जा रही है। ईडब्ल्यूएस व्यवस्था की विसंगतियों, एससी-एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग और सवर्ण आयोग के गठन की मांग को लेकर संगठन ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील की। जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार ने कहा कि सामान्य वर्ग के लोगों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है और अपनी पीड़ा अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास करने वालों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री को सौंपे जाने वाले मांगपत्र में ईडब्ल्यूएस व्यवस्था में बदलाव की मांग प्रमुखता से रखी गई है। संगठन ने कहा कि ईडब्ल्यूएस के तहत जमीन, प्लॉट, मकान और गाड़ी संबंधी शर्तों को हटाया जाए तथा वर्तमान में निर्धारित 10 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया जाए। इसके साथ ही ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र की वैधता एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि मौजूदा विसंगतियां देश के नागरिकों के बीच तनाव पैदा कर रही हैं, इसलिए इन्हें तत्काल दूर किया जाना चाहिए।
मांगपत्र में यूजीसी के कथित काले कानून को भी वापस लेने की मांग की गई है। संगठन का आरोप है कि इस कानून के माध्यम से सामान्य वर्ग के नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उसका कहना है कि प्रतिस्पर्धा के दौरान कुछ लोग अन्य जातियों के लोगों को नीचा दिखाने और अपना वर्चस्व कायम करने के लिए कानून का दुरुपयोग करते हुए मुकदमे दर्ज करा रहे हैं। संगठन ने इस व्यवस्था को लेकर पैदा हो रहे तनाव का हवाला देते हुए संबंधित कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
एससी-एसटी एक्ट को लेकर भी संगठन ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। मांगपत्र में आरोप लगाया गया है कि संपत्ति विवाद और जातिगत दुश्मनी जैसे मामलों में भी एससी-एसटी एक्ट के तहत फर्जी मुकदमे दर्ज कराए जाते हैं, जिससे सामान्य वर्ग के लोग पीड़ित होते हैं और उन्हें न्याय नहीं मिल पाता। संगठन ने दावा किया कि ऐसे मामलों में कानून का दुरुपयोग हो रहा है और सवर्ण समाज के लोगों पर भय बना रहता है। इसी आधार पर संगठन ने एससी-एसटी एक्ट को समाप्त करने की मांग की है। मांगपत्र में यह भी दावा किया गया है कि 90 प्रतिशत से अधिक मुकदमे फर्जी पाए जाते हैं और पैसे के लिए मुकदमे दर्ज कराए जाते हैं।
श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने सामान्य वर्ग की शिकायतों के समाधान के लिए सवर्ण आयोग के गठन की मांग भी दोहराई है। संगठन के अनुसार, आयोग बनने से सामान्य वर्ग के लोग अपनी शिकायतें संबंधित मंच तक पहुंचा सकेंगे और अपनी पीड़ा के समाधान की मांग कर सकेंगे। मांगपत्र में देश में आपसी संघर्ष, तनाव और प्रतिस्पर्धा की स्थिति का उल्लेख करते हुए कानूनों के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताई गई है।
संगठन ने अपने पत्रक में भगवान राम के वंशजों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज और देश में आपसी संघर्ष तथा तनाव की स्थिति चिंताजनक है। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के मिर्जापुर जिला पदाधिकारियों और सदस्यों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ईडब्ल्यूएस की विसंगतियां दूर करने, आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने, प्रमाणपत्र की अवधि तीन वर्ष करने, यूजीसी के कथित काले कानून को वापस लेने, एससी-एसटी एक्ट को समाप्त करने और सामान्य वर्ग के हित में सवर्ण आयोग का गठन करने की मांग स्वीकार करने की अपील की है।