तस्वीर में हापुड़ के शिवगढ़ी में नाले के पास एकत्र लोग और सीमेंट के पाइप दिखाई दे रहे हैं।   

हापुड़ (उत्तर प्रदेश) में शिवगढ़ी मोहल्ले में मुख्य नाले के स्वरूप से छेड़छाड़ और कथित अवैध कब्जे की कोशिश को लेकर हंगामा हो गया। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद नगर पालिका परिषद की टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी की मदद से नाले में डाले गए पाइपों को बाहर निकलवा दिया। कार्रवाई के दौरान पालिका अधिकारियों और निर्माण कराने वाले पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि करीब 30 से 40 फीट चौड़े मुख्य नाले में बड़े-बड़े पाइप डालकर उसके बहाव क्षेत्र को महज आठ फीट तक सीमित करने का प्रयास किया जा रहा था। लोगों ने आशंका जताई कि नाला संकरा होने से बारिश के दिनों में इलाके में भीषण जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है।

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह नाला करीब 10 से 15 मोहल्लों की जल निकासी व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इसके बहाव क्षेत्र को सीमित किए जाने से जल निकासी प्रभावित होने की आशंका जताई गई।

मामले की भनक लगते ही नगर पालिका परिषद की टीम दलबल के साथ मौके पर पहुंची। पालिका प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जेसीबी मशीन की मदद से नाले में अवैध रूप से डाले गए पाइपों को बाहर निकलवा दिया।

नगर पालिका की टीम जब मौके पर कार्रवाई कर रही थी, तभी निर्माण कराने वाले पक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद पालिका अधिकारियों और आरोपी पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामा शुरू हो गया। काफी देर तक मौके पर तनाव और अफरातफरी की स्थिति बनी रही।

पूरे मामले में स्थानीय लोगों का कहना है कि भू-माफिया या निर्माण कराने वाले पक्ष की ओर से नाले की कीमती जमीन पर अवैध रूप से 'कब्जे' का प्रयास किया जा रहा था। हालांकि, जमीन की सही कीमत और कथित कब्जे के दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

नगर पालिका की कार्रवाई के बाद इलाके में जल निकासी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासन अलर्ट मोड पर है। नाले के बहाव क्षेत्र से पाइप हटाए जाने की कार्रवाई ने स्थानीय स्तर पर जलभराव और कथित कब्जे की आशंकाओं को लेकर मामले को गंभीर बना दिया है।

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