हापुड़: UGC के विरोध में कलेक्ट्रेट जा रहे राष्ट्रीय सैनिक संस्था के नेता नजरबंद
यूजीसी कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने जा रहे पदाधिकारियों को पुलिस ने घरों में रोका, अन्य कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध दर्ज कराया।
तस्वीर में पुलिसकर्मी टोपी पहने एक व्यक्ति से घर में बातचीत करते नजर आ रहे हैं।
राष्ट्रीय सैनिक संस्था के पदाधिकारियों के यूजीसी (UGC) के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले सोमवार सुबह हापुड़ में पुलिस की कार्रवाई से हलचल मच गई। कलेक्ट्रेट कार्यालय की ओर प्रदर्शन के लिए जा रहे संस्था के कई प्रमुख पदाधिकारियों को पुलिस ने उनके घरों में हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर लिया। कार्रवाई के बाद संस्था के नेताओं ने सरकार के खिलाफ तीखा आक्रोश जताते हुए विरोध जारी रखने की बात कही।
संस्था के प्रदेश प्रवक्ता ज्ञानेंद्र त्यागी ने हाउस अरेस्ट की कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "यूजीसी का यह काला कानून जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वापस नहीं लेंगे, तब तक हमारा आंदोलन और विरोध प्रदर्शन इसी तरह जारी रहेगा।" ज्ञानेंद्र त्यागी ने आरोप लगाया कि यह कानून समाज को तोड़ने और आपस में बांटने का काम करेगा। उन्होंने देश की एकजुटता बनाए रखने के लिए इस कानून को तुरंत वापस लेने की मांग की।
राष्ट्रीय सैनिक संस्था के जिला अध्यक्ष मुकेश त्यागी ने भी यूजीसी कानून को लेकर विरोध जताया। उन्होंने कहा, "यूजीसी कानून हमारे स्वर्ण समाज के लिए एक काला अध्याय है। इसे किसी भी कीमत पर समाप्त करना ही होगा।" उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिसिया कार्रवाई से डरकर आंदोलन रुकने वाला नहीं है और राष्ट्रीय सैनिक संस्था इस काले कानून के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।
मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने सोमवार सुबह रणनीति के तहत संस्था के सभी मुख्य चेहरों को उनके घरों में कैद कर दिया। संस्था के वरिष्ठ जिला संयोजक हरिराज सिंह त्यागी को तगासराय स्थित उनके आवास पर होम अरेस्ट किया गया। वहीं, पदाधिकारी सोनू कंसल को भी पुलिस ने तगासराय स्थित उनके घर से बाहर नहीं निकलने दिया।
हालांकि, पुलिस की इस कार्रवाई के बावजूद संस्था के कई अन्य पदाधिकारी पुलिस बल को चकमा देकर जिलाधिकारी (DM) कार्यालय पहुंचने में कामयाब रहे। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराने वालों में जिला संरक्षक शशांक मुनि त्यागी, जिला सचिव मुकेश प्रजापति, नगर उपाध्यक्ष राजकुमार वर्मा, चौधरी सीताराम जाटव व दर्जनों अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे। प्रमुख नेताओं की नजरबंदी के बावजूद अन्य पदाधिकारियों का कलेक्ट्रेट पहुंचना यूजीसी के खिलाफ संस्था के विरोध को लेकर बने तनाव को सामने लाता है।