तस्वीर में सपा सांसद रामजीलाल सुमन हापुड़ में पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता का चेक सौंपते हुए।

हापुड़ जिले के बदनौली गांव में हुए दलित युवक दीपक जाटव हत्याकांड के बाद क्षेत्र में सियासी गरमाहट और तनाव बना हुआ है। मंगलवार को पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद और राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल सुमन को भारी पुलिस बल ने गांव के बाहर ही रोक दिया। कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस ने गांव के बाहर कड़ी बैरिकेडिंग कर सपा नेताओं के पूरे काफिले को रोक लिया। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और गहमागहमी देखने को मिली।

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर सांसद रामजीलाल सुमन मृतक दीपक के परिजनों को ढाढस बंधाने और आर्थिक सहायता देने के लिए बदनौली गांव पहुंच रहे थे। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद सांसद पीड़ित परिवार से मिलने की जिद पर अड़ गए। काफी देर तक हंगामा चलता रहा। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने सांसद व सपा नेताओं को समझाने-बुझाने का प्रयास किया, जिसके बाद सहमति बनी।

इसके बाद मृतक दीपक के पिता को गांव के बाहर ही बुलाया गया और उन्हें 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद सौंपी गई। इस सहायता राशि में 1 लाख रुपये का चेक और 1 लाख रुपये नगद शामिल थे।

मीडिया से बातचीत में सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, "हम पहले भी पीड़ित परिवार से मिलने आए थे, तब भी हमें गांव में नहीं जाने दिया गया और आज भी पुलिस ने हमें रोक दिया। जब हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को मृतक दीपक के परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति के बारे में पता चला, तो उन्होंने तुरंत दो लाख रुपये की यह मदद भेजी, जिसे आज हमने सौंप दिया है।"

सांसद रामजीलाल सुमन ने शासन और प्रशासन से मांग की कि इस पूरे हत्याकांड में अपराधियों के खिलाफ सख्त और प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे सपा नेताओं को गांव के बाहर रोके जाने और वहीं मृतक के पिता को आर्थिक सहायता सौंपे जाने की घटना ने दीपक जाटव हत्याकांड को लेकर क्षेत्र में जारी सियासी और प्रशासनिक तनाव को सामने ला दिया है।

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