गढ़मुक्तेश्वर में गंगा नदी में छोड़ी गईं 1 लाख मत्स्य अंगुलिकाएं
रिवर रैचिंग अभियान के जरिए गंगा के पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने और जलीय जीव विविधता के संरक्षण का प्रयास किया गया।
तस्वीर में गढ़मुक्तेश्वर घाट पर नदी किनारे पूजा-अर्चना करते विधायक और अधिकारी दिख रहे हैं।
गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)। गंगा नदी के पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने और जलीय जैव विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गढ़मुक्तेश्वर (ब्रजघाट) में मत्स्य विभाग की ओर से रिवर रैचिंग (River Ranching) कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान के तहत गंगा नदी में 1.00 लाख मत्स्य अंगुलिकाएँ (फिंगरलिंग्स) प्रवाहित की गईं।
कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा नदी में मत्स्य सम्पदा का संरक्षण और संवर्धन करने के साथ स्थानीय पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना है। गंगा की लहरों में बड़ी संख्या में मत्स्य अंगुलिकाएँ छोड़े जाने के दौरान क्षेत्र में मत्स्य पालन से जुड़े लोग भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गढ़मुक्तेश्वर के विधायक हरेन्द्र सिंह तेवतिया उपस्थित रहे। उनके साथ सहायक निदेशक मत्स्य, गाजियाबाद श्रीमती ऋचा चौधरी, सहायक पुलिस अधीक्षक महेश कुमार, निषाद पार्टी, जनपद हापुड़ के अध्यक्ष डी.पी. निषाद, प्रभारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (मत्स्य पालक विकास अभिकरण, हापुड़) सहित क्षेत्र के बड़ी संख्या में मत्स्य कृषक और मछली पालक मौजूद रहे।
इस अवसर पर उपस्थित गणमान्यों ने गंगा नदी की स्वच्छता, निर्मलता और अविरलता बनाए रखने की अपील की। वक्ताओं ने कहा कि रिवर रैचिंग नदी के पानी को साफ रखने में मददगार होने के साथ जलीय जीवों की संख्या में सुधार में भी सहायक होती है।
मत्स्य विभाग के अधिकारियों और अतिथियों ने क्षेत्र के मत्स्य कृषकों को सरकार की ओर से संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी। किसानों को मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया।
गढ़मुक्तेश्वर ब्रजघाट में आयोजित यह रिवर रैचिंग अभियान गंगा की मत्स्य सम्पदा के संरक्षण, संवर्धन और जलीय जैव विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जिसमें 1.00 लाख मत्स्य अंगुलिकाएँ गंगा नदी में प्रवाहित की गईं।