तस्वीर में एटा कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी एम. अरुन्मोली की अध्यक्षता में पर्यावरण और वृक्षारोपण समिति की बैठक के दौरान अधिकारी मौजूद दिखाई दे रहे हैं।

एटा, 05 अक्टूबर। जिला वृक्षारोपण, पर्यावरण एवं गंगा समिति की बैठक जिलाधिकारी एम. अरुन्मोली की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में हुई। बैठक में वृक्षारोपण, पौधों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, गंगा एवं सहायक नदियों की स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने सभी नगरीय निकायों में मियांवाकी पद्धति से सघन वृक्षारोपण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने शहरों से दूर उपयुक्त भूमि का चयन कर सघन वन क्षेत्र विकसित करने को कहा, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ हरित क्षेत्र में वृद्धि हो सके। पूर्व में लगाए गए पौधों की नियमित सिंचाई और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। जिन विभागों ने अभी तक पौधों की जियो टैगिंग पूरी नहीं कराई है, उन्हें तत्काल यह कार्य पूरा करने को कहा गया।

जिलाधिकारी ने जनपद की नर्सरियों में क्षेत्र की जलवायु और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल आसानी से विकसित होने वाली विभिन्न प्रजातियों के पौधों की पर्याप्त संख्या में पौध तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगामी वृक्षारोपण अभियानों के लिए गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध हो सके, इसके लिए नर्सरियों में पहले से आवश्यक तैयारी की जाए।

जिला गंगा समिति की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने गंगा और सहायक नदियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने नदियों के कटान को रोकने तथा नालों और अन्य स्रोतों से दूषित जल नदियों में मिलने से रोकने के लिए प्रभावी प्रबंधन और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। छात्र-छात्राओं और आमजन को नदियों को स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त रखने के लिए जागरूक करने तथा जनभागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया।

बैठक के दौरान जिला गंगा समिति द्वारा आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा दिव्यांशी तथा रंगोली प्रतियोगिता की विजेता खुशी उपाध्याय और अंशिका को सम्मानित किया गया। एनसीसी कैडेट अभिषेक वर्मा को भी जिलाधिकारी ने पुरस्कार प्रदान किया। जिलाधिकारी ने छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि पर्यावरण एवं गंगा संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों की जागरूकता समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से स्वच्छता, जल संरक्षण और नदियों को प्रदूषणमुक्त रखने के लिए आसपास के लोगों को भी जागरूक करने का आह्वान किया।

पर्यावरण समिति के कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने सूखे और गीले कूड़े को घर से ही अलग-अलग एकत्रित कराने तथा गीले कचरे से कंपोस्ट खाद तैयार करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। नगरीय निकायों द्वारा एकत्रित अपशिष्ट का वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण कराने और जहां कूड़ा एकत्रित है, वहां उपलब्ध संसाधनों का सदुपयोग करने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक के विरुद्ध प्रभावी अभियान चलाने और आमजन को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने को कहा। लोगों को घर से ही कपड़े अथवा जूट का थैला लेकर बाजार जाने के लिए प्रेरित करने तथा सिंगल यूज प्लास्टिक एवं पॉलीथिन के प्रयोग को पूरी तरह हतोत्साहित करने पर जोर दिया।

जिलाधिकारी ने जनपद के सभी नगरीय निकायों में स्थित सरकारी एवं गैर सरकारी चिकित्सालयों, नर्सिंग होम आदि में बायोमेडिकल वेस्ट के नियमानुसार निस्तारण की व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी चिकित्सालयों एवं नर्सिंग होम द्वारा बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की स्थिति की पूरी सूची तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

बैठक में डीएफओ विपिन वर्मा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन अजय नारायण सिंह, अपर उप जिलाधिकारी अनवर राशिद फारुखी, उपायुक्त उद्योग अर्चना कुमारी, उप निदेशक कृषि सुमित कुमार, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी प्रदीप कुमार सहित समस्त नगरीय निकायों के अधिकारी और जिला गंगा समिति से आर्यन गौड़ सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में वृक्षारोपण से लेकर पौधों की सुरक्षा, नदी संरक्षण, कचरा प्रबंधन और बायोमेडिकल वेस्ट के नियमानुसार निस्तारण तक पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न कार्यों की स्थिति की समीक्षा की गई।

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