ग्रीन एक्शन वीक 2026' के तहत दिल्ली में भोजन की बर्बादी रोकने और साझा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आयोजित कार्यशाला।

देश में भोजन की बर्बादी की गंभीर स्थिति के बीच उपभोक्ता अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था 'कंज्यूमर वॉयस' ने दिल्ली में खाद्य अपशिष्ट रोकने और भोजन साझा करने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया। 'टुगेदर अगेंस्ट फूड वेस्ट—ए शेयरिंग कम्युनिटी इन एक्शन' नाम से आयोजित इस अभियान के तहत कार्यशालाओं, घर-घर संपर्क और सोशल मीडिया के माध्यम से दिल्ली भर में 700 से अधिक लोगों तक जागरूकता संदेश पहुंचाया गया। दो महीने तक चले इस अभियान का आयोजन 'ग्रीन एक्शन वीक 2026' के तहत किया गया। अभियान का संचालन कंज्यूमर वॉयस की प्रोजेक्ट लीड रिंकी शर्मा और उनकी टीम ने स्थानीय विशेषज्ञों के सहयोग से किया।

जहांगीरपुरी में आयोजित महिला सामुदायिक कार्यशाला में महिलाओं ने बचे हुए भोजन का दोबारा इस्तेमाल करने और खाद्य पदार्थों के उचित भंडारण के तरीके साझा किए। उन्होंने अतिरिक्त भोजन को फेंकने के बजाय पड़ोसियों के साथ साझा करने पर सहमति जताई। इस दौरान सब्जियों के छिलकों और अवशेषों से कलाकृतियां भी बनाई गईं।

कार्यशाला में एक पुरुष प्रतिनिधि ने बची हुई रोटियों से झटपट पिज्जा बनाकर दिखाया। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भोजन की बर्बादी रोकना केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि घर के प्रत्येक सदस्य को इसमें योगदान देना चाहिए।

आर्य हंस राज मॉडल स्कूल में छात्रों ने लिया हिस्सा

भलस्वा स्थित आर्य हंस राज मॉडल स्कूल में आयोजित कार्यशाला में कक्षा 8 के विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान क्विज और समूह चर्चा के माध्यम से भोजन की बर्बादी के कारणों और इसे रोकने में युवाओं की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।

वहीं, ग्रीन एक्शन वीक के दौरान कंज्यूमर वॉयस ने लाजपत नगर स्थित अपने कार्यालय में आम नागरिकों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित किए। संस्था की टीम ने घर-घर जाकर लोगों को भोजन बचाने और खाद्य अपशिष्ट कम करने के प्रति जागरूक किया।

भोजन साझा करने से कम हो सकती है बर्बादी

घरेलू स्तर पर प्रतिदिन बड़ी मात्रा में भोजन फेंक दिया जाता है, जबकि उसका दोबारा इस्तेमाल या पुनरुपयोग किया जा सकता है। भोजन की योजना बनाना, खाद्य पदार्थों का सही भंडारण करना, जरूरत के अनुसार भोजन पकाना और अतिरिक्त भोजन को साझा करना जैसी छोटी आदतें खाद्य अपशिष्ट कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

कंज्यूमर वॉयस की प्रोजेक्ट लीड रिंकी शर्मा ने कहा कि भोजन की बर्बादी केवल रसोई की समस्या नहीं, बल्कि सामुदायिक समस्या है और इसका समाधान भी समुदाय मिलकर कर सकता है। जब पड़ोसी, स्कूल और परिवार भोजन और विचार साझा करते हैं, तो भोजन की बर्बादी कम होती है।

कंज्यूमर वॉयस की वरिष्ठ प्रबंधक (प्रोजेक्ट्स) एकता पुरोहित ने कहा कि जब लोग अपनी जरूरत के अनुसार भोजन और सामग्री का इस्तेमाल करना तथा अतिरिक्त सामग्री साझा करना सीखते हैं, तो भोजन बचाना पूरे समाज की आदत बन जाता है।

संस्था ने स्कूलों और उपभोक्ताओं के लिए भोजन की बर्बादी रोकने से जुड़े आसान सुझावों वाली सचित्र पुस्तिकाएं भी तैयार की हैं।

भोजन बर्बादी में चीन के बाद दूसरे स्थान पर भारत

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की 'फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट 2024' के अनुसार, भारत में हर साल घरों में लगभग 7.82 करोड़ टन (78.2 मिलियन टन) भोजन बर्बाद होता है। यह मात्रा प्रति व्यक्ति औसतन 55 किलोग्राम है। घरेलू स्तर पर भोजन की बर्बादी के मामले में भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है।

यह स्थिति तब है, जब 'ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2024' में भारत 127 देशों में 105वें स्थान पर है और गंभीर भूख की श्रेणी में आता है।

भोजन की बर्बादी रोकने और साझा संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाया गया यह अभियान स्वीडिश सोसाइटी फॉर नेचर कंजर्वेशन के 'ग्रीन एक्शन फंड' और 'कंज्यूमर इंटरनेशनल' के सहयोग से आयोजित किया गया। अभियान के जरिए घरेलू स्तर पर भोजन बचाने की आदतों को प्रोत्साहित करने और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

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